लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
जयपुर में सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला 2025
जयपुर (आर एन सांवरिया): नव वर्ष की उल्लासमयी शुरुआत के साथ सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला 2025 जयपुर में रंगों, रचनात्मकता और ग्रामीण शिल्प कौशल का जीवंत उत्सव बनकर उभरा है। देशभर से आई स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की महिलाएं अपने स्टॉलों के माध्यम से अपनी मेहनत, सृजनशीलता और प्रतिभा का अनोखा प्रदर्शन कर रही हैं।

टेक्सटाइल और हस्तशिल्प का अद्भुत संगम
मेले में भारतीय पारंपरिक और आधुनिक वस्त्र डिज़ाइन का खूबसूरत संगम देखने को मिल रहा है। साड़ियां, दुपट्टे, सुरुचिपूर्ण सूट और ऊनी वस्त्र महिलाओं को विशेष रूप से आकर्षित कर रहे हैं। उच्च गुणवत्ता, बारीक हस्तकला और किफायती मूल्य के चलते आगंतुकों में खरीदारी का उत्साह भी देखने को मिल रहा है।
टेक्सटाइल के साथ-साथ हस्तशिल्प और सजावटी वस्तुएं भी मेले का प्रमुख आकर्षण बनी हैं। मिट्टी, लकड़ी, कपड़े और प्राकृतिक सामग्रियों से निर्मित सजावटी उत्पाद घरों में देसी सौंदर्य और आत्मीयता का अहसास जोड़ रहे हैं। इसके अलावा, ऑर्गेनिक स्नैक्स और पारंपरिक खाद्य पदार्थ स्वास्थ्य और स्वाद दोनों का संतुलन पेश कर रहे हैं।

ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण का मंच
सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला केवल बाजार नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के सशक्तिकरण का मंच भी है। एसएचजी महिलाओं को अपने उत्पादों का प्रदर्शन करने, आत्मनिर्भर बनने और नई आजीविका के अवसर सृजित करने का मौका मिल रहा है। मेले के माध्यम से वे विपणन, प्रस्तुति और ग्राहक संवाद जैसे महत्वपूर्ण कौशल सीख रही हैं, जो उनके भविष्य को और मजबूत बनाएंगे।

सांस्कृतिक संध्याओं ने बढ़ाई रंगत
मेले की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने उत्सव को और जीवंत बना दिया। इस कड़ी में केरल की पारंपरिक लोक कलाएं ‘चंदा’ और ‘नड़पट्टू’ दर्शकों का मन मोहने में सफल रहीं। तालबद्ध संगीत और कलाकारों की ऊर्जावान प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को सांस्कृतिक रंगों से सराबोर कर दिया।
सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला 2025 न केवल खरीदारी और मनोरंजन का केंद्र है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, शिल्प, परंपरा और महिला सशक्तिकरण का जीवंत उत्सव भी है। इस मेले ने नए वर्ष की शुरुआत को खास और यादगार बना दिया है।











































