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लोक कला और हस्तशिल्प का अद्भुत संगम 13 दिसंबर को

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रूमायना रंगोत्सव 13 को मुंबई में, कला और संस्कृति का ऐतिहासिक आयोजन

कबीर, गोरख व मीरा की गूंजेगी वाणीयां, 50 लोक गायक व 25 हस्तशिल्पी बहनें देगी प्रस्तुती

लोक टुडे न्यूज नेटवर्क

*मुंबई/जयपुर। ( अवधेश सागर)  देश की समृद्ध लोक सांस्कृतिक धरोहर अब मुंबई में एक नये रंग में प्रस्तुत होने वाली है। 13 दिसंबर 2024 को रूमादेवी फाउंडेशन द्वारा आयोजित “रूमायना रंगोत्सव” एक ऐतिहासिक कार्यक्रम के रूप में पेश होगा, जो न केवल कला प्रेमियों के लिए, बल्कि देश की पारंपरिक कला और संस्कृति से जुड़ने की चाह रखने वालों के लिए भी खास होगा। यह कार्यक्रम मुंबई के अंधेरी वेस्ट स्थित मुक्ती कल्चरल ऑडिटोरियम में शाम 4 बजे से रात 9 बजे तक आयोजित होगा।
रूमा देवी फाउंडेशन की निदेशक सामाजिक कार्यकर्ता रूमा देवी ने बताया कि कार्यक्रम में भक्तिकाल से चली आ रही प्राचीन वीणा भजन परंपरा की सजीव प्रस्तुति होगी, जिसमें गोरख, कबीर, डूंगरपुरी, मीरा, तुलसी, दादू, सूरदास, रविदास जैसे महान संतों की वाणियों का गायन किया जाएगा। इसके अलावा गांवो की पारंपरिक हस्त कला की प्रदर्शनी भी लगेगी, जिसमें गाँव की महिला हस्तशिल्पियों द्वारा बनाई गई शिल्पकला का जीवंत प्रदर्शन होगा।

कार्यक्रम की तैयारियों में जोश और उत्साह का माहौल

कार्यक्रम संयोजक सुरेश जैन व प्रकाश कानूनगो ने बताया रूमायना रंगोत्सव के लिए तैयारियां अंतिम चरण में हैं। 50 से अधिक लोक कलाकार और 25 महिला हस्तशिल्पी पूरी मेहनत और समर्पण से अपनी प्रस्तुतियों के लिए अभ्यास कर रहे हैं। कार्यक्रम में आठ साल से लेकर अस्सी साल तक के कलाकार अपने अद्भुत हुनर का प्रदर्शन करेंगे। इस मौके पर दर्शकों को न केवल संगीत और कला का संगम देखने को मिलेगा बल्कि वे हमारी सांस्कृतिक विरासत के करीब से अनुभव कर सकेंगे।

*महिला सशक्तिकरण का संदेश*
यह आयोजन महिलाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से भी अहम भूमिका निभाता है। डॉ. रूमादेवी के नेतृत्व में फाउंडेशन ने हजारों महिलाओं को क्राफ्ट, डिज़ाइन और डिजिटल शिक्षा प्रदान की है। रूमायना रंगोत्सव इस दिशा में एक और कदम है, जो इन कारीगरों और कलाकारों की कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर देगा।

*कला प्रेमियों के लिए एक स्वर्णिम अवसर*
कार्यक्रम आयोजन समिति के हरिष पारेख व केडी माली ने कला और संस्कृति प्रेमियों से अपील की है कि वे इस अनूठे आयोजन का हिस्सा बनें और समृद्ध लोक कला और संस्कृति का अनुभव करें। यह कार्यक्रम न केवल कला के कद्रदानों के लिए एक बेहतरीन अवसर है, बल्कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।

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