लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
नितिन मेहरा वरिष्ठ संवाददाता, (राजस्थान)
अजमेर/लेह। लेह-लद्दाख स्थित पवित्र सिंधु घाट पर प्रथम ‘सिंधु कुंभ’ का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस अवसर पर राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने भाग लिया और माँ सिंधु नदी तथा भगवान झूलेलाल की विधिवत पूजा-अर्चना कर देश एवं प्रदेश की खुशहाली, शांति और समृद्धि की कामना की।
देशभर से उमड़े हजारों श्रद्धालु, बना ‘लघु भारत’
इस आयोजन में देश के लगभग 20 राज्यों से 3,500 से अधिक श्रद्धालु, संत और सामाजिक प्रतिनिधि शामिल हुए। राजस्थान से भी 500 से अधिक श्रद्धालु लेह-लद्दाख पहुंचे। विभिन्न भाषाओं, वेशभूषा और परंपराओं के संगम ने सिंधु तट को ‘लघु भारत’ का स्वरूप प्रदान किया।
सिंधु नदी भारतीय सभ्यता की पहचान: देवनानी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि सिंधु नदी केवल एक जलधारा नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता, सनातन संस्कृति और राष्ट्रीय अस्मिता की प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इसी पावन तट पर वेदों और उपनिषदों की रचना हुई तथा लोकदेवता भगवान झूलेलाल का अवतरण हुआ।
उन्होंने कहा कि यह स्थल अब राष्ट्रीय एकता और आस्था के केंद्र के रूप में ‘पांचवें धाम’ की पहचान प्राप्त कर रहा है। साथ ही उन्होंने भगवान झूलेलाल के संदेश—प्रेम, सामाजिक समरसता और जल संरक्षण—को वर्तमान समय में अत्यंत प्रासंगिक बताया।
कई राज्यों के गणमान्य लोग रहे मौजूद
इस अवसर पर जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर सहित कई संत-महात्मा उपस्थित रहे। कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता, त्रिपुरा विधानसभा अध्यक्ष रामपादा जमातिया और सिंधु कुंभ अभियान से जुड़े वरिष्ठ नेता इन्द्रेश कुमार सहित अनेक गणमान्य लोग शामिल हुए।
पर्यावरण संरक्षण व नशा मुक्ति का संकल्प
देवनानी ने बताया कि आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं को पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, स्वच्छता और नशामुक्त समाज के निर्माण का संकल्प दिलाया गया। उन्होंने कहा कि सिंधु कुंभ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक एकता और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक है।
उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कुछ वर्षों में सिंधु नदी तटों का व्यापक विकास हुआ है, जिससे इन स्थलों पर श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है और ये क्षेत्र आध्यात्मिक केंद्र के रूप में उभर रहे हैं।