लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
डीडवाना जिले की कुचामन पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने लाखों रुपए के जेवरात और नकदी चुराने वाली एक गैंग का पर्दाफाश करते हुए चार शातिर चोरों को गिरफ्तार किया है। साथ ही चोरी का माल खरीदने वाले एक ज्वैलर्स को भी पकड़ा है।
पुलिस ने आरोपियों से 5500 ग्राम चांदी, चांदी के बर्तन और 100 ग्राम सोना भी बरामद किया है। साथ ही वारदात में इस्तेमाल की गई होंडा सिटी कार को भी जब्त किया है। पुलिस के अनुसार यह चोर गैंग जयपुर, अजमेर, नागौर, भीलवाड़ा, अलवर, चूरू और सीकर जिलों में सक्रिय थी। राज्य के सात जिलों में इस गैंग के बदमाशों पर दर्जनों गंभीर आपराधिक मामले दर्ज है। अब पुलिस आरोपितों से पूछताछ कर रही है। पुलिस को चोरी, लूट सहित अनेक आपराधिक वारदातों का खुलासा होने की उम्मीद है।
कुचामन के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के नेमीचंद खारिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस गैंग का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि गत दोनों कुचामन शहर के एक घर के ताले तोड़कर इन चोरों ने चोरी की वारदात को अंजाम दिया था। यह चोर m इस मकान से सोने चांदी के आभूषण, चांदी के बर्तन सहित नगदी चुरा कर ले गए थे। साथ ही घर में लगे सीसीटीवी कैमरा की डीवीआर मशीन भी उठा कर ले गए थे। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच शुरू की और आसपास लगे 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरे चेक किए। इस दौरान वारदात में एक कार में सवार चार-पांच व्यक्तियों द्वारा चोरी करने का इनपुट सामने आया, जिस पर पुलिस ने चोरों की सघन तलाश की। पुलिस ने पेशेवर चोरों के साथ ही संदिग्ध और स्थानीय लोगों पर भी नजर रखी।
इस दौरान सुरसुरा निवासी मुन्ना नामक एक व्यक्ति से जब पूछताछ की गई तो उसने चोरी की वारदात में शामिल होने की बात स्वीकारी। साथ ही अपने अन्य साथियों के बारे में भी पुलिस को जानकारी दी। इसके बाद पुलिस ने कुचामन निवासी आसिफ उर्फ आसू को गिरफ्तार कर लिया। वहीं अजमेर की सेंट्रल जेल में बंद एक अन्य आरोपी प्रवीण कुमार को भी प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार कर लिया। इसके अलावा इन चोरों से चोरी का माल खरीदने वाले ब्यावर निवासी ज्वैलर्स भरत सोनी को भी गिरफ्तार किया गया।
पुलिस की जांच में सामने आया है कि आरोपी दिन में सुने और बंद मकान की रेकी करते थे और रात को अपने साथियों को बुलाकर चोरी को अंजाम देते थे। उसके बाद माल को अपने साथियों के साथ भेज कर दिन में फिर से अपने काम धंधे पर चले जाते हैं, ताकि किसी को कोई शक नहीं हो। दिन के समय रेकी करते हुए सीसीटीवी कैमरा से बचने के लिए मुंह पर गमछा लपेट लेते थे और अपनी चाल भी बदल लेते थे, ताकि सीसीटीवी फुटेज में कोई इन्हें पहचान नहीं सके। अगर घर में भी सीसीटीवी कैमरे लगे होते हैं, तो उनकी डीवीआर मशीन खोलकर साथ ले जाते और सुनसान जगह फेंक देते। वारदात के समय अपने मोबाइल फोन भी घर पर ही छोड़ देते थे, ताकि घटनास्थल पर उनकी लोकेशन का पता नहीं चल सके। घटना के बाद बदमाश मुख्य रास्तों से नहीं जाकर अलग-अलग रास्तों और टोल नाकों को छोड़ते हुए अपने ठिकाने तक पहुंचते थे।














































