लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
किसानों का घटा खर्च और बढ़ी रफ्तार
गंगधार (झालावाड़) | राजस्थान
खेती-किसानी में बढ़ती मजदूरी, श्रमिकों की कमी और कृषि लागत में लगातार हो रही बढ़ोतरी के बीच राजस्थान के झालावाड़ जिले के किसानों ने देशी तकनीक से एक अनोखा समाधान खोज निकाला है। जिले के गंगधार क्षेत्र के हरनीखेड़ा गांव के किसान जीवन सिंह झाला ने मोटरसाइकिल को ही खरपतवार (खपतवार) हटाने वाली मशीन में बदल दिया है। इस नवाचार से खेतों में फसल की कतारों के बीच उगी अनावश्यक घास-फूस को कम समय, कम मेहनत और बेहद कम खर्च में साफ किया जा रहा है।
मजदूरी की समस्या से मिला नवाचार का विचार
किसान जीवन सिंह झाला ने बताया कि पहले खेतों में खरपतवार हटाने के लिए मजदूरों पर निर्भर रहना पड़ता था। मजदूरी लगातार बढ़ने और समय पर श्रमिक नहीं मिलने से खेती की लागत बढ़ रही थी। इसी समस्या का समाधान तलाशते हुए उन्होंने अपनी मोटरसाइकिल को खेतों में उपयोगी कृषि उपकरण में बदलने का निर्णय लिया।
ऐसे काम करता है यह देशी जुगाड़
इस अनोखे उपकरण में मोटरसाइकिल के पीछे एक मजबूत लोहे का फ्रेम लगाया गया है, जिसे चेन की सहायता से जोड़ा गया है। फ्रेम पर बांस और लोहे की एंगल के सहारे तीन कुलपे (Weeders) लगाए गए हैं। जैसे ही मोटरसाइकिल खेत में आगे बढ़ती है, ये कुलपे फसल की कतारों के बीच उगी खरपतवार को उखाड़ते हुए आगे बढ़ते हैं। इससे फसल को नुकसान पहुंचाए बिना खेत की निराई आसानी से हो जाती है।
कम खर्च, कम मेहनत और समय की बचत
किसान का दावा है कि इस देशी जुगाड़ से जहां पहले कई मजदूरों की जरूरत पड़ती थी, वहीं अब एक व्यक्ति अकेले ही कम समय में अधिक क्षेत्र की निराई कर सकता है। इससे मजदूरी का खर्च घटता है, समय की बचत होती है और खेती अधिक लाभदायक बनती है।
अन्य किसानों के लिए भी बन रहा प्रेरणा
जीवन सिंह झाला का यह नवाचार आसपास के गांवों के किसानों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन गया है। कई किसान इस तकनीक को देखने पहुंच रहे हैं और इसे अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे कम लागत वाले स्थानीय नवाचार छोटे और मध्यम किसानों के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकते हैं।