लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
11 पदाधिकारियों पर एफआईआर की सिफारिश
जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट में दान राशि, सोना-चांदी और निर्माण कार्यों के लेखा-जोखा पर उठे सवाल; समिति ने लगाए राजनीतिक साजिश के आरोप, मामला न्यायिक प्रक्रिया में।
प्रदीप कुमार डागा | नागौर
नागौर। राजस्थान के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल श्री चतुरदास महाराज मंदिर, बुटाटी धाम में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर विवाद गहरा गया है। जिला प्रशासन की ओर से गठित 13 सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट सामने आने के बाद मंदिर विकास समिति की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। रिपोर्ट में करीब 22.74 करोड़ रुपये की कथित अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए 11 पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की गई है।
हालांकि मंदिर विकास समिति ने जांच रिपोर्ट को एकतरफा बताते हुए राजनीतिक साजिश करार दिया है और निष्पक्ष एजेंसी से दोबारा जांच कराने की मांग की है। मामला फिलहाल न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है।
जांच रिपोर्ट में क्या सामने आया?
जिला प्रशासन की जांच समिति ने 23 जून 2026 को जिला कलेक्टर देवेंद्र कुमार यादव को रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में वित्तीय रिकॉर्ड, आय-व्यय विवरण, कैश बुक, ऑडिट दस्तावेज और अन्य अभिलेखों की जांच के आधार पर कई बिंदुओं का उल्लेख किया गया है।
जांच रिपोर्ट के अनुसार—
- वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 में करीब 15.16 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता का उल्लेख किया गया।
- वर्ष 2025-26 के दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने पर करीब 7.58 करोड़ रुपये का प्रतिकूल अनुमान लगाया गया।
- कुल मिलाकर करीब 22.74 करोड़ रुपये की कथित अनियमितताओं का आकलन किया गया।
- मंदिर में रखे सोने-चांदी के आभूषणों के रिकॉर्ड और स्टॉक रजिस्टर को लेकर भी सवाल उठाए गए।
- रिपोर्ट में करीब 36 किलो चांदी और 250 ग्राम सोने से जुड़े रिकॉर्ड में विसंगतियों का उल्लेख किया गया।
- निर्माण कार्यों, भोजनशाला, रसोई खर्च, सीसीटीवी व्यवस्था, गोशाला मद और दान पेटी आय-व्यय में भी जांच समिति ने अनियमितताओं की बात कही।
11 पदाधिकारियों पर कार्रवाई की सिफारिश
जांच समिति ने तत्कालीन और वर्तमान 11 पदाधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, रिकॉर्ड में हेरफेर और साक्ष्य से छेड़छाड़ जैसे आरोपों में एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की है।
इसके अलावा समिति ने रिकॉर्ड सुरक्षित रखने, बैंक खातों की जांच, फॉरेंसिक ऑडिट और वर्तमान व्यवस्था की समीक्षा जैसे सुझाव भी दिए हैं।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद मामला राजनीतिक रंग भी लेने लगा है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सोशल मीडिया के माध्यम से भाजपा और आरएसएस पर निशाना साधा।
वहीं नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने मामले में सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों और आस्था से जुड़े मामलों में पारदर्शिता जरूरी है।
मंदिर विकास समिति ने लगाए साजिश के आरोप
मंदिर विकास समिति के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह ने जांच रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा कि जांच प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं रही। उन्होंने आरोप लगाया कि समिति को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया और सभी दस्तावेज उपलब्ध कराए गए थे।
समिति ने निष्पक्ष जांच एजेंसी से दोबारा जांच कराने की मांग की है।
प्रशासन का पक्ष
जिला कलेक्टर देवेंद्र कुमार यादव ने कहा कि समिति को दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था, लेकिन कई महत्वपूर्ण रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए गए। प्रशासन ने जांच के आधार पर अनियमितताओं की बात कही है।
क्या है पूरा विवाद?
बुटाटी धाम लंबे समय से श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। मंदिर में आने वाले चढ़ावे, दान और भामाशाहों के सहयोग से जुड़े वित्तीय प्रबंधन को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे।
जिला कलेक्टर के आदेश पर डेगाना एसडीएम मोहन चौधरी के नेतृत्व में गठित 13 सदस्यीय टीम ने करीब 146 दिनों तक जांच की। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर प्रशासन ने आगे की कार्रवाई की सिफारिश की है।
अब आगे क्या?
मामला फिलहाल न्यायिक प्रक्रिया में है। उच्च न्यायालय के निर्देशों के कारण तत्काल कठोर कार्रवाई नहीं की गई है। अब आगे की दिशा कोर्ट की सुनवाई, प्रशासनिक कार्रवाई और संभावित दोबारा जांच के निर्णय पर निर्भर करेगी।
बुटाटी धाम विवाद ने धार्मिक संस्थाओं की वित्तीय पारदर्शिता और प्रबंधन व्यवस्था को लेकर प्रदेशभर में नई बहस छेड़ दी है।
