जिला कलक्टर ने किया सांवरिया सेठ हथकरघा फाउंडेशन सोसाइटी का निरीक्षण

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

  महिला सशक्तिकरण और पारंपरिक कला की सराहना

असनावर (झालावाड़)। जिला कलक्टर अजय सिंह राठौड़ ने असनावर स्थित सांवरिया सेठ हथकरघा फाउंडेशन सोसाइटी का निरीक्षण कर पारंपरिक हथकरघा कला के संरक्षण, महिला रोजगार सृजन और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में किए जा रहे कार्यों की सराहना की।

 
निरीक्षण के दौरान जिला कलक्टर ने सोसाइटी में तैयार किए जा रहे विभिन्न हथकरघा उत्पादों और कपड़ों पर हैंडब्लॉक प्रिंटिंग का अवलोकन किया। उन्होंने बुनकरों और महिला कारीगरों से संवाद कर उत्पादन प्रक्रिया, डिजाइनों की विशेषताओं और विपणन व्यवस्था की जानकारी ली।

जिला कलक्टर ने कहा कि सोसाइटी पारंपरिक हथकरघा कला को संरक्षित करने के साथ उसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि संस्था के माध्यम से करीब 50 ग्रामीण महिलाओं को रोजगार मिला है, जो महिला सशक्तिकरण का उत्कृष्ट उदाहरण है।

सोसाइटी द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों में गागरोनी तोता साड़ी, गागरोनी तोता बेडशीट, सिंगल एवं डबल खेस, सिंगल एवं डबल बेडशीट, टॉवल सहित कई पारंपरिक हथकरघा उत्पाद शामिल हैं। इन उत्पादों में स्थानीय कला, संस्कृति और पारंपरिक डिजाइनों की झलक देखने को मिलती है।

जिला कलक्टर ने महिलाओं द्वारा अखबार की रद्दी से हैंडबैग, मोबाइल बैग और अन्य उपयोगी सामग्री तैयार करने की पहल की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि यह पुनर्चक्रण के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और रोजगार सृजन का प्रेरणादायक उदाहरण है।

उन्होंने सोसाइटी के बुनकरों को मिले राज्य एवं जिला स्तरीय सम्मानों का उल्लेख करते हुए बताया कि सुजानमल को वर्ष 2025 में गागरोनी तोता साड़ी के लिए राज्य स्तरीय बुनकर पुरस्कार में द्वितीय स्थान मिला था, जबकि इस वर्ष गीता बाई को इसी उत्पाद के लिए प्रथम जिला स्तरीय बुनकर पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

जिला कलक्टर ने कहा कि यह उपलब्धि न केवल बुनकरों बल्कि पूरे झालावाड़ जिले की पारंपरिक हथकरघा कला के लिए गौरव की बात है।

निरीक्षण के दौरान संबंधित अधिकारी, सोसाइटी के पदाधिकारी, बुनकर और बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ता उपस्थित रहीं। जिला कलक्टर ने उत्पादों के विपणन, डिजाइन विकास और प्रशिक्षण गतिविधियों को और अधिक मजबूत करने के निर्देश देते हुए विश्वास जताया कि यह संस्था भविष्य में झालावाड़ की पारंपरिक हथकरघा कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाएगी।

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