लोक टुडे न्युज़ नेटवर्क
राजसमंद (गौतम शर्मा)। जिले के झोर, कुंवारिया, खंडेल, फियावड़ी, लापस्या सहित आसपास के गांवों में बुधवार को पारंपरिक खेखरा पर्व बड़े उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस मौके पर सदियों पुरानी बेलों को भड़काने की अनूठी परंपरा का जीवंत प्रदर्शन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया।
सुबह से ही बेलों को विशेष रूप से सजाया गया। उनके शरीर पर रंग-रोहण कर मोरपंखी, घुंघरू और पारंपरिक सजावट धारण करवाई गई। इसके बाद पंडितों द्वारा मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना हुई और महिलाओं ने पारंपरिक गीतों और भजनों से माहौल को आध्यात्मिक बना दिया।
पूजा के उपरांत पटाखे छोड़कर बेलों को भड़काया गया, जिसे स्थानीय भाषा में ‘खेखरा भड़काना’ कहा जाता है। इस दौरान पूरे गांव में उत्साह और उल्लास का माहौल छा गया।
ग्रामीणों ने बताया कि यह परंपरा सुख-समृद्धि और पशुधन की रक्षा के लिए प्रतिवर्ष मनाई जाती है। कार्यक्रम में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने उत्सव का आनंद लिया और देर रात तक हंसी-खुशी का माहौल बना रहा।