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नारी स्वतंत्रता भारतीय संस्कृति की प्रमुख विशेषता : डॉ. अनामिका पुनिया

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

नागौर/डीडवाना(प्रदीप कुमार डागा)। वर्तमान समय में महिलाओं की स्वतंत्रता को लेकर समाज में विभिन्न प्रकार के विमर्श चल रहे हैं। महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में सकारात्मक पहल के साथ-साथ स्वतंत्रता के नाम पर पाश्चात्य प्रभाव एवं सांस्कृतिक मूल्यों से दूर होती जीवनशैली भी चिंता का विषय बनती जा रही है।

इन्हीं विषयों पर आयोजित विचार गोष्ठी में “महिलाओं की स्वतंत्रता की विकृतियाँ और समकालीन विमर्श” विषय पर मुख्य वक्ता डॉ. अनामिका पुनिया ने अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि महिलाएं आज केवल देश ही नहीं बल्कि विश्व स्तर पर नेतृत्व कर रही हैं।

उन्होंने इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि दक्षिण भारत की वीरांगना रानी रुद्रमा देवी ने यह सिद्ध किया कि नेतृत्व क्षमता लिंग पर निर्भर नहीं करती। वहीं अहिल्याबाई होल्कर ने देशभर में सड़कों, कुओं, घाटों, धर्मशालाओं और मंदिरों का पुनर्निर्माण करवाकर समाज सेवा एवं सुशासन का उदाहरण प्रस्तुत किया।

डॉ. पुनिया ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को शक्ति, संस्कार और मर्यादा का प्रतीक माना गया है। महिलाओं की वास्तविक स्वतंत्रता वह है जो उन्हें आत्मसम्मान, सुरक्षा, शिक्षा, स्वावलंबन और निर्णय क्षमता प्रदान करे। उन्होंने कहा कि आधुनिकता की अंधी दौड़ में कई बार स्वतंत्रता की परिभाषा स्वच्छंदता में बदलती दिखाई देती है, जिससे पारिवारिक और सामाजिक संरचना प्रभावित होती है।

उन्होंने कहा कि महिलाओं के अधिकारों के साथ-साथ उनके कर्तव्यों, संस्कारों और सामाजिक दायित्वों पर भी संतुलित चर्चा आवश्यक है। भारतीय परंपरा सदैव महिला सम्मान की पक्षधर रही है और वर्तमान समय में आधुनिकता एवं सांस्कृतिक मूल्यों के बीच संतुलन स्थापित करना जरूरी है।

कार्यक्रम में महिलाओं की शिक्षा, सुरक्षा, रोजगार और सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि स्वस्थ एवं सकारात्मक विमर्श ही समाज को सही दिशा प्रदान कर सकता है।

इस अवसर पर उगाराम टाक (छोटी खाटू), श्याम मंत्री (कुचामन सिटी) तथा भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष श्याम प्रताप सिंह राठौड़ सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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