लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
गंगधार (झालावाड़), अश्विन शुक्ल पूर्णिमा।
गंगधार के गढ़ मोहल्ला स्थित श्री माता महालक्ष्मी नृसिंह मंदिर परिसर में महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर श्रद्धा और उत्साह से कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर नृसिंह मित्र मंडल द्वारा पूजन-अर्चन, माल्यार्पण और महर्षि के जीवन चरित्र का वाचन किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत महर्षि वाल्मीकि की मूर्ति पर पुष्प अर्पित कर की गई। वक्ताओं ने बताया कि वाल्मीकि संस्कृत साहित्य के आदि कवि माने जाते हैं — उन्होंने भगवान राम के जीवन पर आधारित रामायण की रचना की, जिसमें सात खंडों और 24,000 श्लोकों के माध्यम से धर्म, संस्कृति, कर्तव्य, नैतिकता और आदर्श जीवन का संदेश दिया गया।
वाल्मीकि आश्रमों का धार्मिक और सामाजिक महत्व
कार्यक्रम में वक्ताओं ने महर्षि वाल्मीकि के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए बताया कि जब माता सीता को वनवास दिया गया था, तब उन्होंने महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में ही शरण ली थी। महर्षि ने सीता के पुत्रों लव और कुश को शिक्षा और संस्कार दिए। यही कारण है कि आज भी वाल्मीकि आश्रमों का धार्मिक और सामाजिक रूप से विशेष महत्व है।
वृक्षारोपण और उद्बोधन
इस अवसर पर मंदिर परिसर में वृक्षारोपण भी किया गया। कार्यक्रम में मथुरेश शर्मा और दशरथनंदन पांडे ने उद्बोधन देते हुए कहा कि महर्षि वाल्मीकि का जीवन हमें यह प्रेरणा देता है कि यदि व्यक्ति सकारात्मक बदलाव चाहता है तो वह अपने जीवन को महान दिशा में मोड़ सकता है।
कार्यक्रम में उपस्थित
इस अवसर पर दशरथनंदन पांडे, मथुरेश शर्मा, आशीष शर्मा, अंकुर निगम, विष्णु शर्मा, आशीष भट्ट, रवि व्यास, भैरुपुरी, दिनेश गिरी, कैलाश गोस्वामी, शिवगिरी, प्रेम गोस्वामी, सोनू शर्मा, आस्तिक निगम सहित नृसिंह मित्र मंडल के कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर वाल्मीकि जयंती पर समाज में सद्भाव, एकता और संस्कारों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।













































