लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
भीलवाड़ा/गंगापुर। आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर भीलवाड़ा जिले के गंगापुर क्षेत्र के लोगों की एक बड़ी मांग अब भी अधूरी है – रेल सेवा। गुरलां, पोटला, कुरज और कुंवारिया सहित क्षेत्र की कई तहसीलों के लोग आज भी रेल गाड़ी के आने का इंतजार कर रहे हैं।
पिछली कोशिशें और सर्वेक्षण
वर्ष 2011 से 2014 में तत्कालीन रेलवे मंत्री सी.पी. जोशी ने भीलवाड़ा से नाथद्वारा वाया गंगापुर नई रेल लाइन के लिए सर्वेक्षण करवाया। 111 किलोमीटर लंबाई की इस नई रेल लाइन के लिए लगभग 916.87 करोड़ रुपए का अनुमान लगाया गया। सर्वेक्षण रिपोर्ट रेलवे बोर्ड को भेजी गई, लेकिन स्वीकृति नहीं मिली।
विकास, पर्यटन और रोजगार के लिए आवश्यक
गंगापुर क्षेत्र का औद्योगिक महत्व बहुत अधिक है। यहाँ आईसक्रीम, मिनरल्स, मार्बल जैसे उद्योग हैं। पर्यटन और रोजगार के लिहाज से भी यह क्षेत्र रेल सेवा से जुड़े बिना पिछड़ा हुआ है।
नई लाइन की लंबाई और बजट
पूर्व में प्रस्तावित 111 किलोमीटर लंबी रेल लाइन अब कुंवारिया तक लगभग 75 किलोमीटर में सीमित हो सकती है। इससे निर्माण लागत में भी कमी आएगी।
गंगापुर में आंदोलन की तैयारी
रेल सेवाओं के अभाव से परेशान क्षेत्रवासियों ने गंगापुर रेल विस्तार संघर्ष समिति का गठन किया है। अध्यक्ष रामप्रसाद माली और सदस्य सत्यनारायण सेन गुरला ने कहा कि समिति चरणबद्ध अभियान और जनआंदोलन के माध्यम से रेल विस्तार की मांग उठाएगी।
रेल सेवा विस्तार का महत्व
समिति के सदस्यों का कहना है कि गंगापुर क्षेत्र को देश और प्रदेश की राजधानी, महानगरों से सीधे जोड़ने के लिए रेल नेटवर्क का विस्तार अनिवार्य है। यह क्षेत्र औद्योगिक, सामरिक और पर्यटन दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
1954 से रेल सेवाओं के विस्तार की कवायद चल रही है, लेकिन गंगापुर क्षेत्र आज तक समग्र रेल नेटवर्क से नहीं जुड़ पाया। सामाजिक संगठनों और स्थानीय प्रतिनिधियों की सक्रियता के बाद ही अब इस क्षेत्र के लोगों को रेल सुविधा मिलने की उम्मीद है।













































