लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
जयपुर। (रूपनारायण सांवरिया)
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा एसआईआर प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोपों को पूरी तरह निराधार और दुर्भावनापूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि गहलोत के बयान लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर हमला है और यह कांग्रेस की पुरानी आदतों में से एक है कि जब भी राजनीतिक जमीन कमजोर पड़ती है, संस्थाओं की निष्ठा पर सवाल उठाकर भ्रम फैलाने का प्रयास किया जाता है।
राठौड़ ने कहा कि चुनाव आयोग देश की सबसे विश्वसनीय संवैधानिक संस्था है। उस पर “बेवकूफी”, “मिलीभगत”, “खराब नीयत” जैसे शब्दों का इस्तेमाल करना गहलोत की हताशा और बौखलाहट को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि एसआईआर (Special Intensive Revision) तो मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने की एक नियमित प्रक्रिया है। कांग्रेस इसे मुद्दा बनाकर जनता को गुमराह करना चाहती है ताकि संभावित चुनावी पराजय का बहाना पहले से तैयार किया जा सके।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने गहलोत द्वारा एसआईआर को आत्महत्याओं और बंगाल की घटनाओं से जोड़ने को अत्यंत गैर-जिम्मेदाराना बताया। उन्होंने कहा कि संवेदनशील मामलों को राजनीतिक रंग देना कांग्रेस की एक और आदत है, जिसका जनता पर कोई भरोसेमंद प्रभाव नहीं पड़ता।
उन्होंने कहा कि गहलोत का “जनता को सड़कों पर आने” का आह्वान लोकतांत्रिक व्यवस्था को चुनौती देने जैसा है। बिहार में एसआईआर के दौरान 65 लाख ऐसे नाम हटाए गए थे जो मृत्यु, पलायन या दोहराव के कारण सूची में गलत तरीके से दर्ज थे, और यह सुधारात्मक कार्रवाई पूरी तरह उचित थी।
मदन राठौड़ ने कहा कि भाजपा हमेशा पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया के पक्ष में खड़ी है। चुनाव आयोग सभी दलों को समान अवसर देता है। आयोग पर हमला देश की संवैधानिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने जैसा है। उन्होंने कहा कि गहलोत को आरोप लगाने से पहले कांग्रेस की गिरती हालत और अपने कमजोर होते जनाधार पर नजर डालनी चाहिए।















































