लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
गुरु शिष्य परंपरा ज्ञान, कौशल और आध्यात्मिक विकास का माध्यम: सीए मुकेश चंद्र नवाल
भीलवाड़ा। (पंकज पोरवाल) गुरु-शिष्य परंपरा भारतीय संस्कृति की आत्मा है। यह ज्ञान, कौशल और आध्यात्मिक विकास का माध्यम है। यह बात सीए मुकेश चंद्र नवाल ने मुख्य वक्ता के रूप में गुरु वंदन छात्र अभिनंदन कार्यक्रम मे कही। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ संस्कार भी आवश्यक हैं ताकि हमारी आने वाली पीढ़ी शिखर पर पहुंच सके। इस दौरान सीए नवाल ने राष्ट्र प्रेम, गुरु सम्मान, और अध्यात्म के महत्व को रेखांकित किया।
इससे पुर्व भारत विकास परिषद महाराणा प्रताप शाखा भीलवाड़ा द्वारा एमएलवी गवर्नमेंट कॉलेज भीलवाड़ा में गुरु वंदन छात्र अभिनंदन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में लगभग 250 विद्यार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत स्वामी विवेकानंद और भारत माता के चित्रों के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुई। मनोहर डुमलिया ने भारत विकास परिषद के उद्देश्यों और संचालित गतिविधियों के बारे में विस्तार से बताया।
शाखा के सदस्यों ने सभी शिक्षकों को उपरणा ओढ़ाकर पेन और नोटबुक भेंटकर सम्मानित किया। महाविद्यालय के प्रधानाचार्य को भी उपरणा ओढ़ाकर श्रीफल और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। प्रधानाचार्य ने भारत विकास परिषद के सभी सदस्यों का हृदय से आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर शाखा के अध्यक्ष प्रेम नारायण मिश्रा, सचिव सतीश बोहरा, और अन्य सदस्य उपस्थित थे। कार्यक्रम का आयोजन संस्कार प्रकल्प के तहत किया गया और इसका उद्देश्य छात्रों को नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूक करना था। शाखा सदस्य गोपाल समदानी ने उपस्थित सभी को भारतीय संस्कृति की परंपराओं और राष्ट्र के प्रति अपने उत्तरदायित्व का निर्वहन हेतु शपथ दिलाई।












































