लोक टुडे न्यूज नेटवर्क

कोमल अरन अटारिया
निर्देशक,लेखक,साहित्यकार, मुंबई
भारतीय तिरंगा आज चिनाब नदी पर बने दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे ब्रिज पर फहरा दिया गया है इसी के साथ भारत ने अपनी अभियान्त्रिक क्षमता को दुनिया को दिखाते हुए ये ऐलान किया है की भारत अब सिर्फ और सिर्फ विकास की प्रगति पर ही अपना ध्यान केन्द्रित करना चाहता है। चिनाब नदी पर बने इस पुल ने प्राकृतिक विषम परिस्थितयों के सफल जुड़ाव को दर्शाते हुए भारत के नागरिकों को हर मौसम में कश्मीर घाटी से रेल संपर्क प्रदान करेगा। देश की इस स्वर्णिम सफलता पर हर नागरिक को गर्व करना चाहिए,किसी भी ऊंचाई पर पहुंचना अपने आप में ही एक कठिन कार्य होता है और खास कर पर्वतीय क्षेत्रों में इस तरह के कार्यों को पूरा करना किसी चुनौती से कम नहीं।
वैसे अगर भारत का इतिहास देखा जाये तो सदियों से ही भारत ने हर क्षेत्र में विश्व को अपनी कलाकृतियों से अवगत करवाया है। पर आज बदलते युग के साथ चलते हुए इस बार चिनाब नदी के उपर आर्क ब्रिज का शिखर स्थापित कर दिया और पेरिस के एफिल टावर को पीछे छोड़ते हुए इसे दुनिया के सबसे ऊँचे रेलवे पुल का तमगा दिलाना बड़ी उपलब्धि है। हम सभी को इसे महज़ एक पुल के रूप में नहीं बल्कि भारतीय मेधा, उसके श्रम और बल की एक नई ऊंचाई के रूप में स्वीकार करना चाहिये ,जो लोग कल तक जम्मू और कश्मीर को भारत से अलग करने की फ़िराक में थे उनके इरादों को ख़ाक करने की अग्नि है, ये पुल, चिनाब का ये शिखर भारत के विरोधियों को पाताल तक ले जाने का रास्ता है।
चिनाब सेतु, एक संकल्प है,
ऊँचाइयों का, कायाकल्प है |
राम सेतु की परम्परा, अब हवाओं में बह रही,
ये सागर तट से पहाड़ों तक की, पौराणिक गाथा है |
भारत के, मस्तक की शान है,
हिन्दुस्तानियों की,, आन है |
नया कीर्तिमान है शिखर पर विद्यमान है,
ये सेतु विश्व भर में, अब हमारा अभिमान है |
विश्वकर्मा का, आशीर्वाद है,
नवीनीकरण का ,शंखनाद है |
कश्मीर की फिजायें, मद मस्त लहरा रही हैं,
चिनाब सेतु की ऊँचाइयों पर, भारतीय ध्वजा फहरा रही हैं|
त्रेता युग में राम सेना ने समुद्र का सीना चीर कर राम सेतु का निर्माण किया था तो आज उस संस्कृति को जीवित रखते हुए दो ऊँचे पहाड़ों की तेज़ हवाओं के बीच राम के धनुष के आकार को साकार करते हुए इसे नवीनता के साथ-साथ पौराणिक वास्तुशिल्प को भी समर्पित कर दिया। जहाँ राम सेतु अधर्म पर धर्म की जीत का मार्ग बना तो चिनाब का ये सेतु ऊँचाइयों का सम्पर्क सूत्र बनकर कश्मीर जिसे भारत का स्वर्ग कहा जाता है, उसी स्वर्ग तक भारत के नागरिकों को आसानी से पहुँचाने में अपनी भूमिका निभाता रहेगा । इस सेतु पर बिछी लोहे कि दो पटरियां राष्ट्रीय विकास की मजबूती का प्रतीक हैं । अब भारतीय रेलवे के पहिये ऊँचाइयों पर सरपट दौड़ते हुए पर्यटन यात्रा के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक ग्रोथ को भी सफल बनायेंगे।
चिनाब सेतु की 1,315 मीटर की ये लम्बाई जम्मू कश्मीर की भारतीय सीमा के लिए भी कई मायनों में ख़ास है आम नागरिकों के साथ-साथ भारतीय सेना की आवाजाही को सरलता प्रदान करते हुए देश की उत्तरी सीमाओं की रक्षा अब और भी आसान हो जायेगी और पूरे वर्ष कश्मीर क्षेत्र के लिए एक रणनैतिक स्थाई सम्पर्क स्थापित हो सकेगा।
वंदे भारत ट्रेन अब पूरे भारत के सफ़र को वन्दे मातरम् की ध्वनि से राष्ट्रीय एकता को एक। गे में पिरोने को अब तैयार है| आम जनमानस की प्रगतिशील भारत की कामना अब चिनाब सेतु से गुजरती हुई हिमालय की चोटी तक जाने को आतुर है ।
आज हम सभी हमारे भारतीय संसाधनों, अभियंताओं और मजदूरों की 16 साल की तपस्या का परिणाम देख रहे हैं और उनके इस संघर्ष का ये अनुभव आने वाले पीढ़ियों के लिए एक सुखद मार्ग है । भारत के विकास को और भी ज्यादा आगे बढ़ाने के लिए अब ये हमारे भारत की विरासत है और हम सब को भी इसकी सुरक्षा का भार उठाना पड़ेगा। हम अपने कर्तव्यों को भारतीय सरकार पर नहीं छोड़ सकते हैं क्योंकि ये हर भारतीय की संपत्ति है आइये आज एक प्रण करें की हम सभी को भारत की हर उपलब्धि पर मान सम्मान के साथ अपने तिरंगें की शान को ऊंचाइयों के शिखर तक ले जाना है ।
आज हर भारतवासी भारतीय सरकार और भारतीय रेल की इस अभूतपूर्व ऊंचाई के लिए अपने हृदय से धन्यवाद देता है|