लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
आस्था के पथ पर रोडवेज का रोड़ा:
विशेष रिपोर्ट: सत्यनारायण सेन गुरला, भीलवाड़ा
भीलवाड़ा। मेवाड़ के प्रसिद्ध श्री सांवरिया सेठ के दर्शनों के लिए भीलवाड़ा से वाया गुरला, कारोई, पहुना, राशमी, मातृकुंडिया, शनि धाम, कपासन और भादसोड़ा होकर जाने वाला मार्ग श्रद्धालुओं के लिए चुनौतीपूर्ण बन गया है। धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण इस मार्ग पर सरकारी रोडवेज बस सेवा नहीं है, जिससे लाखों श्रद्धालु निजी बसों और वाहनों पर निर्भर हैं।
धार्मिक पर्यटन के प्रमुख स्थलों की उपेक्षा
इस मार्ग पर स्थित स्थल जैसे:
- गुरला – पर्यटन स्थल
- कारोई – ज्योतिषीय गणनाओं के लिए प्रसिद्ध
- पहुना – मरमी माता का स्थान
- राशमी – मातृकुंडिया
- शनि धाम – पश्चिमी राजस्थान के श्रद्धालुओं का केंद्र
- कपासन – हजरत दिवाना शाह दरगाह
- भादसोड़ा – सांवरिया धाम का प्रवेश द्वार
इनके बावजूद चित्तौड़गढ़ व भीलवाड़ा डिपो द्वारा इस रूट पर कोई बस सेवा नहीं चलाई जा रही।
निजी ऑपरेटरों की मनमानी और यात्रियों की मुश्किलें
- अत्यधिक किराया: निजी बसों में अक्सर तय दर से अधिक किराया वसूला जाता है।
- ओवरलोडिंग: बसों में क्षमता से अधिक सवारियां भरी जाती हैं, जिससे हादसों का खतरा बना रहता है।
- समय की अनिश्चितता: निजी बसें हर कस्बे में लंबा ठहराव करती हैं, जिससे यात्रा लंबी हो जाती है।
सरकार द्वारा बुजुर्गों और महिलाओं को मिलने वाली रियायतें इस मार्ग के यात्रियों को नहीं मिल पा रही हैं।
रोडवेज प्रशासन की अनदेखी
- भीलवाड़ा से सांवरिया सेठ वाया चित्तौड़गढ़ रूट पर कई रोडवेज बसें चलती हैं, जबकि गुरला–कारोई–पहुना–राशमी–शनि धाम–कपासन–भादसोड़ा मार्ग पर कोई बस नहीं।
- पहले इस रूट पर भी बस सेवा थी, लेकिन कोरोना के बाद बंद कर दी गई।
जनता की मांग
क्षेत्र के ग्रामीण और श्रद्धालु चाहते हैं कि:
- इस मार्ग पर दो-तीन नई रोडवेज सेवाएं तुरंत शुरू की जाएं।
- सुबह भीलवाड़ा से सांवरिया सेठ दर्शन के लिए रवाना होने और शाम को वापसी की सुविधा हो।
- धार्मिक उत्सवों, एकादशी, अमावस्या जैसे मौकों पर विशेष शटल बसें चलाई जाएं।
श्रद्धालुओं का कहना है कि यदि यह सुविधा शुरू की जाए तो “आस्था के पथ पर सफर सुगम और सुरक्षित” हो सकेगा।


















































