लोक टुडे न्युज़ नेटवर्क
सैकड़ों कोवा बालियों पर बैठकर कर रहे ‘पेट पूजा’, खेतों में जीवन और हरियाली का अनुभव
पादूकलां।
पादूकलां के एक किसान के बाजरे के खेत में सैकड़ों कोवा पक्षी बालियों पर बैठकर दाने चुगते हुए नजर आए। किसान ने बताया कि यह नजारा हर साल फसल पकने के समय देखने को मिलता है और इसे देखकर प्रकृति की अनुपम सुंदरता का अहसास होता है।
प्रकृति और मानव का संतुलित संबंध
किसान मुस्कुराते हुए कहते हैं,
“हम फसल उगाते हैं, लेकिन प्रकृति ने सबको उसका हिस्सा दे रखा है। पशु-पक्षी भी इसके भागीदार हैं।”
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पुराने समय से किसान फसल का कुछ हिस्सा जानवरों और पक्षियों के लिए छोड़ते आए हैं। इससे न केवल पर्यावरण संतुलन बना रहता है, बल्कि खेतों में जीवन की चहचहाहट भी बनी रहती है।
खेतों में हरियाली और उत्साह
कोवों की उड़ान और चहचहाहट खेतों में हरियाली और उत्साह का अनुभव कराती है। यह दृश्य दर्शाता है कि धरती पर हर जीव का एक अधिकार और हिस्सा है। चाहे फसल मनुष्य उगाए, लेकिन उसका आनंद सभी को मिलना चाहिए।
संदेश: संतुलन और सौंदर्य
यह दृश्य याद दिलाता है कि जब तक मनुष्य और प्रकृति का यह संबंध बना रहेगा, जीवन में संतुलन और सुंदरता बनी रहेगी। खेतों में पक्षियों की यह गतिविधि केवल दृश्य सुंदरता नहीं बल्कि प्रकृति और मानव के मधुर संबंध का प्रतीक भी है।
