लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज और उपकरण बरामद
अजमेर | वरिष्ठ संवाददाता नितिन मेहरा (राजस्थान)
नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल (NSP) में कथित सेंध लगाकर अल्पसंख्यक वर्ग के विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति राशि हड़पने वाले एक अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का अजमेर की सिविल लाइन थाना पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने राजस्थान से सैकड़ों किलोमीटर दूर पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिले में कार्रवाई करते हुए गिरोह के दो कथित सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार मामले की जांच जारी है और कई अहम खुलासे होने की संभावना है।
विशेष टीम ने की कार्रवाई
मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवाला के निर्देश पर विशेष जांच टीम का गठन किया गया। एएसपी (शहर एवं मुख्यालय) हिमांशु जांगिड़ के सुपरविजन तथा सीओ नॉर्थ शिवम जोशी की निगरानी में सिविल लाइन थानाधिकारी शंभू सिंह शेखावत के नेतृत्व में टीम ने तकनीकी अनुसंधान शुरू किया।
साइबर ट्रैकिंग और डेटा विश्लेषण के आधार पर जांच पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिले के काजीगच्छ और चकलागच्छ गांवों तक पहुंची। स्थानीय पुलिस के सहयोग से घेराबंदी कर दोनों आरोपियों को हिरासत में लिया गया।
तलाशी में मिला कथित साइबर नेटवर्क का बड़ा सेटअप
पुलिस के अनुसार आरोपियों के कब्जे से बड़ी मात्रा में फर्जी दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए हैं। बरामद सामग्री में शामिल हैं—
- 85 एक्टिवेटेड सिम कार्ड और कई मोबाइल फोन
- हजारों आधार कार्ड एवं अन्य सरकारी दस्तावेजों की प्रतियां
- लैपटॉप और प्रिंटर
- बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट मशीन
- विभिन्न बैंकों के एटीएम कार्ड और बैंक खातों से संबंधित डेटा
पुलिस का कहना है कि बरामद सामान से एक संगठित साइबर नेटवर्क संचालित होने के संकेत मिले हैं।
छात्रवृत्ति योजना में कथित फर्जीवाड़े का खुलासा
प्रारंभिक जांच के अनुसार गिरोह कथित रूप से अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजना के ऑनलाइन सत्यापन सिस्टम में मौजूद कमियों का फायदा उठाता था। पुलिस का दावा है कि आरोपी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल (NSP) पर पंजीकरण कराते थे और तकनीकी हेरफेर व बायोमेट्रिक उपकरणों की मदद से सत्यापन प्रक्रिया पूरी कर छात्रवृत्ति की राशि फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर करवाते थे।
कई राज्यों तक फैले नेटवर्क की आशंका
सिविल लाइन थाना पुलिस आरोपियों को अजमेर लेकर आई है और अदालत से रिमांड प्राप्त कर पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस गिरोह के तार देश के कई राज्यों तक फैले हो सकते हैं। पुलिस विभागीय मिलीभगत या बैंकिंग सिस्टम से जुड़े अन्य लोगों की संभावित संलिप्तता के पहलुओं की भी जांच कर रही है।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और जांच पूरी होने के बाद ही घोटाले की वास्तविक राशि, नेटवर्क के आकार तथा अन्य आरोपियों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।

















































