अलवर की मूसी रानी की छतरी — एक प्रेम गाथा, जो पत्थरों में गूंजती है

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मेरी ट्रेवल डायरी से

कंटेंट : राखी जैन वरिष्ठ पत्रकार

फोटो : योगेश शर्मा वरिष्ठ फोटो जनर्लिस्ट

अरावली की पहाड़ियों की तलहटी मेंअलवर शहर के मध्य स्थित है एक ऐसा स्मारक — जो सिर्फ एक ऐतिहासिक स्थल नहींबल्कि श्रद्धाप्रेम और बलिदान की जीवित प्रतीक है। यह है मूसी रानी की छतरीजो अलवर के सागर तालाब के किनारे स्थित है और राजा बख्तावर सिंह तथा उनकी सती रानी मूसी की स्मृति में बनाई गई थी।

 

स्मारक से पहलेएक लोकविश्वास…

यह छतरी सिर्फ एक स्थापत्य चमत्कार नहींबल्कि स्थानीय आस्था का भी केंद्र है। कहा जाता है कि यहां बने राजा और रानी के पदचिन्हों को पानी से धोकर यदि कोई उस जल को अपने शरीर पर लगाता हैतो उसे शारीरिक व्याधियों से राहत मिलती है। यह श्रद्धा आज भी कई लोगों को यहां खींच लाती है।

 

सागर और नौका विहार की स्मृतियाँ

छतरी के पास ही स्थित है ऐतिहासिक सागर तालाबजहां कभी महाराजा नौका विहार किया करते थे। तालाब के शांत जल में छतरी की परछाई एक ऐसा दृश्य बनाती हैजो आंखों से उतरकर मन में बस जाती है।

मूसी रानी — एक सतीएक स्मृति

इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि महाराज बख्तावर सिंह की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी मूसी रानीजो उनसे उम्र में काफी छोटी थीउनकी चिता पर सती हो गईं। यह स्मारक उनकी स्मृति और बलिदान को नमन करने हेतु महाराज विनय सिंह द्वारा बनवाया गया।

छतरी का स्थापत्य सौंदर्य

यह दो मंजिला छतरी लाल बलुआ पत्थर से बनी हैऔर पूरी संरचना पत्थरों के स्तंभों पर टिकी है। इसकी भीतरी छत पर पौराणिक कहानियों के रंगीन चित्र उकेरे गए हैं – विशेषकर कृष्ण लीला और राजा की हाथी पर सवारी का भव्य दृश्य। सूर्यास्त के समय जब सुनहरी किरणें इसके गुंबदों पर पड़ती हैंतो उसकी छाया सागर में उतरती हुईजैसे इतिहास को फिर से जीवंत कर देती है।

 

एक सांस्कृतिक केंद्र

मूसी रानी की छतरी न केवल पर्यटकों के लिए आकर्षण हैबल्कि अलवर की सांस्कृतिक गतिविधियों का भी केंद्र बन चुकी है। यहाँ मत्स्य उत्सव जैसे आयोजनों में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होती हैंऔर राजस्थान पर्यटन विभाग समय-समय पर कार्यक्रम आयोजित करता है।

 

एक स्मृतिएक प्रेरणा

मूसी रानी की छतरी उन विरलों में से एक धरोहर हैजो सिर्फ कैमरे में कैद नहीं होती — बल्कि आत्मा में बस जाती है। यह एक प्रेम-गाथा हैएक श्रद्धांजलि हैऔर साथ ही एक ऐसी वास्तुकलाजो समय की हर कसौटी पर खरी उतरती है।

 

 

Lensman Yogesh Sharma की नज़रों से

Yogesh Sharma ने इस छतरी की हर तस्वीर को एक जीवंत कथा की तरह प्रस्तुत किया है.

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