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हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है बछबारस पर्व

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हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है बछबारस पर्व
लोक टुडे न्यूज नेटवर्क

राकेश शर्मा
पादू कलां (नागौर) पादूकलां। गोवत्स (बछबारस) द्वादशी का पर्व आज कस्बे सहित आस पास के ग्रामीण आँचल में बुधवार को हर्षोल्लास से मनाया जा रहा है। बुधवार को अल सुबह से ही गायों की पूजा के लिए महिलाओं की भीड़ उमड़ने लगी। मौहल्ले की गली मोहल्ला में महिलाओं ने झाइयों और बछड़ों का पूजन किया तथा दुर्गा देवी व सुमन उपाध्याय ने बछबारस की कथा विधिवत कथा सुनाई ।इस मौके पर मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना की गई और लोग दान करने के साथ ही गायों को हरा चारा खिलाकर पुण्य कमा रहे हैं। महिलाओं ने व्रत रखकर गाय-बछड़ों की पूजा की और परिवार की खुशहाली की मन्नौतियां मांगी। महिलाओं ने अपने पति की दीर्घायु की ईश्वर से कामना की भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी को गोवत्स द्वादशी कहते हैं। इसे बछवारस के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भादवा कृष्ण पक्ष की द्वादशी के अवसर पर बछबारस पर्व मनाया जाता है जिसमें महिलाएं अपने कार्य से निवृत होकर स्नान कर कर सोलह सिंगार कर गौ माता को उसके बछड़े की पूजन करने के लिए मंगल गीत गाती हुई जाती है।जिन महिलाओं को गाय-बछड़ा नहीं मिला उन्होंने मिट्टी के गाय बछड़ा की मूर्तिया बनाकर पूजा अर्चना की और उस पर दही, भीगा हुआ बाजरा, आटा, घी आदि चढ़ाए। रोली से तिलक लगाकर चावल और दूध चढ़ाया। पूजा के बाद मोठ, बाजरा पर रुपया रखकर सास को भेंट किया। बछबारस पर घरों में मक्का, बाजरा और जौं के ठंडे पकवान खाए गए। महिलाएं बच्छ बारस पर गौवत्सा गाय और बछड़े का पूजन करेंगी।

यह है लोकमान्यता

लोक मान्यताओं के आधार पर गाय में देवताओं का वास होता है। भगवान श्री कृष्ण को गाय का बछड़ा प्रिय माना गया है इसीलिए कृष्ण को रिझाने के लिए गाय, बछड़े और गोवर्धन का छोटा सा तालाब बना कर पूजा की जाती है। भगवान गोपाल श्री कृष्ण से अपनी संतान की रक्षा, सुख-समृद्धि व उज्जवल भविष्य के लिए मन्नत मांगी जाती है। संतान प्राप्ति व संतान सुख के लिए इस व्रत को सर्वोत्तम माना जाता है। इस दिन गाय का दूध, दही, गेहूं चावल नहीं खाया जाता है। गाय के दूध निर्मित पदार्थ का सेवन नहीं किया जाता है। बाईट: वरिष्ठ महिला कौशल्या देवी बोहरा

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