लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
50 फीट रोड का पूर्ववर्ती नाम स्वीकार, आचार्य श्री महाश्रमण का नाम नगर परिषद को पुनः समर्पित
गौतम शर्मा
राजसमन्द।
राजसमंद । आचार्य श्री महाश्रमण के आदेश एवं स्वीकृति पर जैन समाज ने एक महत्वपूर्ण और सराहनीय निर्णय लेते हुए टीवीएस चौराहे से पानी की टंकी तक 50 फीट रोड के नामकरण से जुड़े विवाद का शांतिपूर्ण समाधान कर दिया है। जैन समाज ने इस मार्ग पर आचार्य श्री महाश्रमण का नाम न रखे जाने पर सहमति जताते हुए पूर्ववर्ती नाम को ही स्वीकार करने का निर्णय लिया है।
सोमवार देर शाम जैन समाज के प्रतिनिधि मंडल ने जिला कलक्टर अरुण कुमार हसीजा के निवास पर पहुँचकर एक लिखित पत्र सौंपा। पत्र के माध्यम से जैन समाज ने 50 फीट रोड के संदर्भ में आचार्य श्री महाश्रमण का नाम पुनः जिला प्रशासन एवं नगर परिषद को समर्पित करते हुए स्पष्ट किया कि वे किसी भी प्रकार का विवाद नहीं चाहते।
“राजसमंद शांत और सद्भावपूर्ण नगर बना रहे”
जैन समाज ने पत्र में कहा कि राजसमंद एक शांत, सुदृढ़ और अच्छी छवि वाला नगर है तथा किसी भी प्रकार के विवाद या हिंसा के लिए यहां कोई स्थान नहीं होना चाहिए। केवल नामकरण के कारण यदि विवाद की स्थिति बनती है और उसमें आचार्य श्री महाश्रमण का नाम आता है, तो यह पूरे जैन समाज को आहत करता है।
जिला कलक्टर अरुण कुमार हसीजा ने जैन समाज के इस निर्णय की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए इसे शहर में शांति, सद्भाव और सामाजिक समरसता की दिशा में एक प्रेरणादायी पहल बताया।
पत्र में क्या कहा गया
पत्र में जैन समाज ने उल्लेख किया कि आचार्य श्री महाश्रमण कभी भी किसी भी प्रकार की प्रतिष्ठा या लाभ की आकांक्षा नहीं रखते। 30 नवंबर 2025 को कांकरोली आगमन के दौरान, सर्व समाज द्वारा उनका श्रद्धा से अभिनंदन किया गया था और 2023 के प्रस्ताव के आधार पर 50 फीट रोड का नामकरण “आचार्य श्री महाश्रमण अहिंसा मार्ग” के रूप में हुआ था, जिससे जनमानस में उत्साह था।
हालांकि बाद में उत्पन्न हुई परिस्थितियों के कारण विवाद की स्थिति बनी, परंतु समाज इस बात से संतोष व्यक्त करता है कि सर्व समाज ने बड़े मन का परिचय देते हुए केवल प्रक्रिया पर आपत्ति जताई, न कि भावना पर।
राजपूत समाज की भूमिका की सराहना
जैन समाज ने पत्र में विशेष रूप से राजपूत समाज द्वारा प्रदर्शित परिपक्वता, सद्भाव और सामंजस्य की भावना की प्रशंसा करते हुए आभार व्यक्त किया। पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया कि राजसमंद क्षेत्र के संस्थापक महाराणा राजसिंह सभी समाजों के लिए पूज्य हैं और उनके अपमान की कल्पना भी असंभव है।
“अहिंसा के नाम पर हिंसा स्वीकार्य नहीं”
पत्र में कहा गया कि अहिंसा का उपदेश देने वाले आचार्य श्री महाश्रमण के नाम पर यदि हिंसा या तनाव का माहौल बनता है, तो यह जैन समाज के सिद्धांतों के विरुद्ध है। इसी भावना के तहत जैन तेरापंथ समाज ने सर्व समाज, राज्य सरकार, जनप्रतिनिधियों एवं नगर परिषद को यह नामकरण पुनः समर्पित करने का निर्णय लिया।
प्रतिनिधि मंडल में ये रहे उपस्थित
जिला कलक्टर निवास पर उपस्थित प्रतिनिधियों में लाभचंद बोहरा (सभाध्यक्ष, कांकरोली), धनेन्द्र मेहता (सभा मंत्री), शांतिलाल कोठारी (वरिष्ठ श्रावक), तनसुख तुकलिया (उपाध्यक्ष), लक्ष्मीलाल बाफना, कमलेश बोहरा, मदन धोका, महेन्द्र कोठारी, हिम्मत मेहता सहित अन्य गणमान्य सदस्य शामिल रहे।