लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
जयपुर। एक पुलिस वाली से धोखाधड़ी के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान हाउसिंग बोर्ड के पूर्व चयरमेंन व नामी बिल्डर के विरुद्ध FIR दर्ज करने के आदेश दिए हैं। प्राथीया राजस्थान पुलिस में इंस्पेक्टर के पद पर पुलिस हैडक्वाटर सिविल राइट्स विभाग पर तैनात हैं लेकिन अभियुक्तगण की ऊंची पहुंच के कारण पुलिस थाना मानसरोवर ने एक पुलिस अधिकारी की रिपोर्ट दर्ज नहीं की।
पुलिस ने नहीं की सुनवाई तो जाना पड़ा कोर्ट की शरण
इससे व्यथित होकर महिला पुलिस अधिकारी ने न्यायालय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट क्रम संख्या 10 जयपुर महानगर प्रथम में एक परिवाद प्रार्थना पत्र अंतर्गत धारा 210 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत अपराध अंतर्गत धारा 318 (4)316 (2 )351 (2) (3) व धारा 61 (2) के तहत भारतीय न्याय संहिता में प्रस्तुत किया। जिसमें परिवादिया के अधिवक्ता बाबूलाल बैरवा एडवोकेट,अमित वर्मा, धर्मराज बैरवा, अशोक बैरवा ने न्यायालय को बताया कि परिवादिया के मोबाइल नंबर पर माह जून 2024 को सरदार अजय पाल सिंह के कर्मचारी अधिकारी सुरेंद्र, दीपक,प्रदीप,संजय व प्रताप सिंह ने परिवादिया को कहा कि अजमेर रोड बगरू टोल प्लाजा से पहले एक कॉलोनी यूनीक सिटी एक्सटेंशन लॉन्च हो रही है, जिसमें पहले आओ पहले पाओ के आधार पर आपना मकान बुक कर सकती है। उनके इस झांसे में आकर परिवादिया ने 22950 प्रति वर्ग गज की रेट से स्वयं अपने नाम से व अपने रिश्तेदार के नाम से दो प्लांट बुक कर दिए । बुकिंग राशि की एवरेज में ₹200000 का चेक अभियुक्त सुरेंद्र को दे दिया। उक्त चेक की राशि यूनिक ड्रीम बिल्डर्स के मालिक व राजस्थान हाउसिंग बोर्ड जयपुर के पूर्व अध्यक्ष सरदार अजय पाल सिंह के खाते में ट्रांसफर की गई।अभियुक्तगण के बताएं गए समय के अनुसार प्राथीया ने शेष राशि अदा कर अपने हक में विक्रय पत्र पंजीयन करवाने के लिए कहा तो अभियुक्तगण पूर्व में तो आश्वासन देते रहे लेकिन उसके बाद उक्त दोनों भूखंडों को दीगर व्यक्ति को बेचने की कहते रहे।
पहले कम पैसे में प्लाट बुक किया बाद में ज्यादा पैसे मांगे
परिवादिया ने अपने द्वारा निश्चित तय की गई राशि अदा करने के लिए कहा तो अभियुक्त गणों ने परिवादिया को ऐलानिया धमकी देते हो कहा की आप यदि दोनों भूखंड प्राप्त करना चाहती हैं तो ₹35000 प्रति वर्ग गज के हिसाब से राशि अदा करो, जबकि प्राथिया के साथ उक्त दोनों भूखंडों की राशि 22950 प्रति वर्ग गज के हिसाब से तय की गई थी। ऐसा नहीं करने पर प्रार्थियों के साथ की गई धोखाधड़ी के संबंध में थाना मानसरोवर में मुकदमा दर्ज करने हेतु प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया, परंतु अभियुक्तगण की ऊंची पहुंच के चलते पुलिस थाना मानसरोवर ने Fir दर्ज नहीं कर केवल परिवार दर्ज किया, जिससे व्यथित होकर परिवादिया ने न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया, जिस पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट क्रम संख्या 10 जयपुर महानगर प्रथम के पीठासीन अधिकारी मनीष शर्मा ने पुलिस थाना मानसरोवर को Fir दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने के आदेश प्रदान किया।
अब पुलिस वाली को मिल सकेगा न्याय
अब पीड़िता पुलिस वाली को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है हालांकि वादी की ऊंची पहुंच के चलते अभी से महिला पर कई तरह का दबाव आ सकता है।










































