अलवर रेप केस-अनुसंधान अधिकारी की लापरवाही पर हाईकोर्ट सख्त

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लोक टुडे न्यूज नेटवर्क

जयपुर/अलवर।  पीड़िता के साथ बलात्कार और उसके मंगेतर को जान से मारने की धमकी के मामले में पुलिस थाना राजगढ़, जिला अलवर में FIR संख्या 180/2025 दर्ज की गई। प्रकरण में अभियुक्त ने पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया और उसके मंगेतर को धमकी दी कि अगर उसने शादी की तो उसे जान से मार देगा।

इस धमकी का असर यह हुआ कि पीड़िता के मंगेतर ने शादी से इंकार कर दिया। सामाजिक दबाव के चलते पीड़िता के पिता ने आनन-फानन में दूसरी जगह शादी तय कर दी। पीड़िता और उसके परिवार को सामाजिक और मानसिक प्रताड़ना झेलना पड़ी। पुलिस से न्याय की उम्मीद थी वो भी नहीं मिला।

अदालत में सुनवाई और अधिवक्ता की दलीले

पीड़िता की ओर से राजस्थान हाईकोर्ट के  अधिवक्ता बाबूलाल बैरवा ने बताया कि—

  • अभियुक्त ने पीड़िता के मंगेतर को दो अलग-अलग मोबाइल नंबरों से धमकी दी।

  • इन नंबरों की कॉल हिस्ट्री को सबूत के रूप में पेश करना जरूरी था।

  • 12 अगस्त 2025 को कॉर्डिनेट बेंच ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड पेश करने का आदेश दिया था।

  • लेकिन अनुसंधान अधिकारी राजेश कुमार (थाना राजगढ़, अलवर) ने आदेश की अवहेलना की और कॉल हिस्ट्री कोर्ट में प्रस्तुत नहीं की।

हाईकोर्ट की सख्ती

सुनवाई के दौरान माननीय न्यायाधीश अशोक कुमार जैन ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए अनुसंधान अधिकारी के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट ने अनुसंधान अधिकारी को चालानी गार्ड बुलाकर गिरफ्तार करने के मौखिक आदेश दिए।

हालांकि, अनुसंधान अधिकारी ने अपनी गलती सुधारने का निवेदन किया। जिस पर अदालत ने अंतिम अवसर देते हुए आदेश दिया कि—

कल, 26 अगस्त 2025 की सुबह तक कमी को पूरा कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए, अन्यथा सजा भुगतने के लिए तैयार रहें।

यह मामला न केवल अभियुक्त के अपराध से जुड़ा है, बल्कि पुलिस अनुसंधान में हुई गंभीर लापरवाही को भी उजागर करता है। अब देखना होगा कि अदालत के अगले आदेशों के बाद पीड़िता को न्याय की दिशा में कितनी राहत मिलती है।

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