खनन परियोजना के विरोध में ग्रामीणों का आक्रोश उबाल पर

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लोक टुडे न्यूज नेटवर्क 

पिण्डवाड़ा की पहाड़ियों पर संकट  

सैकड़ों ग्रामीण जिला मुख्यालय पहुंचे, राष्ट्रपति–प्रधानमंत्री तक पहुंचाई गुहार

रिपोर्ट – तुषार पुरोहित, सिरोही
सिरोही। सिरोही जिले की पिण्डवाड़ा तहसील में प्रस्तावित चुना पत्थर खनन परियोजना का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। मंगलवार को क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीण जिला मुख्यालय पहुंचे और जिला कलेक्टर को राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि “किसी भी हाल में पिण्डवाड़ा की ऐतिहासिक पहाड़ियों को खनन की भेंट नहीं चढ़ने देंगे।”

ग्रामीणों का कहना है कि इस परियोजना से न केवल क्षेत्र की पर्यावरणीय संरचना खतरे में है, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और भौतिक जीवन भी प्रभावित होगा। उनका आरोप है कि खनन से पहाड़ खत्म हो जाएंगे, खेती-बाड़ी चौपट हो जाएगी और आदिवासी समाज उजड़ जाएगा।


विरोध की लहर थमने का नाम नहीं ले रही

अरावली श्रृंखला और आसपास के आदिवासी बहुल गांवों में खनन परियोजना के खिलाफ विरोध लगातार बढ़ रहा है। जिला मुख्यालय पर पहुंचे ग्रामीणों ने जमकर नारेबाजी की और परियोजना को तुरंत निरस्त करने की मांग की।

वाटेरा सरपंच सविता देवी ने कहा – “जनता एकजुट है, इस परियोजना को हर हाल में रद्द करवाया जाएगा। सरकार को क्षेत्र के भविष्य से खिलवाड़ करने की इजाजत नहीं देंगे।”


जनसुनवाई बनी विरोध का केंद्र

19 सितम्बर को भीमाना पंचायत भवन में आयोजित पर्यावरणीय जनसुनवाई में भी ग्रामीणों ने तीखा विरोध दर्ज कराया था। ग्रामीणों का आरोप था कि जनसुनवाई की सूचना छिपाई गई और इसे छोटे कक्ष में आयोजित किया गया। भारी विरोध के बाद प्रशासन को बैठक बाहर टेबल-कुर्सियों पर करनी पड़ी।

उस दौरान ग्रामीणों ने 100 से अधिक लिखित आपत्तियाँ दर्ज कराते हुए इस परियोजना को जनविरोधी करार दिया था।


ग्रामीणों की मुख्य मांगें

ग्रामीणों ने साफ कहा कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो उग्र आंदोलन होगा। मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:

  • पिण्डवाड़ा क्षेत्र में सभी खनन स्वीकृतियाँ रद्द की जाएं।

  • अरावली पर्वतमाला को “खनन-मुक्त क्षेत्र” घोषित किया जाए।

  • पेसा एक्ट, फॉरेस्ट राइट्स एक्ट और EIA Notification 2006 का सख्ती से पालन हो।

  • नियम विरुद्ध जनसुनवाई कराने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई हो।


खनन से संभावित खतरे

ग्रामीणों ने आशंका जताई कि खनन शुरू होने पर:

  • खेत–खलिहान और जंगल नष्ट हो जाएंगे।

  • धूल प्रदूषण से दमा, कैंसर और श्वसन रोग बढ़ेंगे।

  • भूजल स्तर नीचे जाएगा।

  • तेंदुआ, सियार, खरगोश और पक्षियों का प्राकृतिक आवास खत्म होगा।

  • आदिवासी समाज की कृषि और पशुपालन आधारित आजीविका पूरी तरह प्रभावित होगी।


प्रशासन पर गंभीर आरोप

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन पर आरोप लगाया कि नेताओं के दबाव में काम हो रहा है और जनसुनवाई केवल औपचारिकता भर थी। उनकी लिखित आपत्तियों को गंभीरता से नहीं लिया गया।


आंदोलन तेज करने की चेतावनी

ग्रामीण प्रतिनिधियों ने ऐलान किया – “किसी भी हालत में खनन नहीं होने देंगे। जरूरत पड़ी तो हजारों की संख्या में क्षेत्रवासी सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे।”


ज्ञापन सौंपने के दौरान मौजूद रहे

इस मौके पर वाटेरा सरपंच सविता देवी, पंचायत समिति सदस्य बलवंत चौधरी भारजा, भाजपा नेता रतन लाल गरासिया, कांग्रेस नेता राकेश देवासी, शिवसेना नेता भरत राजपुरोहित, उड़ता सूरज संगठन से भरत चौधरी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।


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