कलेक्टर से राष्ट्रपति तक गुहार, फिर भी किसान को नहीं मिला इंसाफ?

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शिकायतों के बावजूद नहीं रुका अतिक्रमण, प्रशासनिक लापरवाही से पीड़ित परेशान
राज्य सूचना आयोग ने एसडीएम के वेतन से रकम काटकर आयोग में जमा करने के लिए दिए निर्देश
सूचना आयोग ने लगाया 1000 का जुर्माना
लोक  टुडे न्यूज नेटवर्क
नागौर/जयपुर। जिला कलेक्टर से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय और राष्ट्रपति कार्यालय तक दर्जनों बार शिकायत करने के बावजूद  पीड़ित किसान रामदेव सेन की समस्या का समाधान अब तक नहीं हो पाया है। पीड़ित का आरोप है कि पंचायत राज विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन के संरक्षण के चलते उनकी जमीन पर वर्षों से जारी अतिक्रमण हटाया नहीं जा रहा।

शिकायतों की फाइलें दब गईं दफ्तरों में, किसान की जमीन पर अतिक्रमण बरकरार

परिवादी ने बताया कि उसने अपनी शिकायतें मुख्य सचिव, राजभवन, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, प्रधानमंत्री कार्यालय, विभिन्न विधायकों और शासन सचिवालय के अधिकारियों तक भेजीं, लेकिन सभी स्तरों पर कार्यवाही सिर्फ कागजों तक सीमित रही।
प्रशासनिक लापरवाही का शिकार किसान, राजकीय निधि से भी हो रहा अतिक्रमण
पीड़ित का कहना है कि हालात इतने गंभीर हैं कि राजकीय निधि का इस्तेमाल भी निजी व्यक्तियों की जमीन और प्रार्थी के खेत पर अतिक्रमण कार्यों में किया जा रहा है। इसके चलते उसकी खेतीबाड़ी बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
सूचना के अधिकार के तहत सूचना मांगने पर भी जुर्माना लगने  के बावजूद नहीं दे रहे जानकारी
उन्होंने यह भी कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 आमजन को न्याय दिलाने का सशक्त माध्यम है, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही और उदासीन रवैये की वजह से शिकायतें बेअसर साबित हो रही हैं।
प्रार्थी ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेकर दोषियों पर कड़ी कार्यवाही की जाए और अतिक्रमण हटाकर पीड़ित को न्याय दिलाया जाए।दर्जनों बार शिकायतों के बाद भी किसान की जमीन से अतिक्रमण नहीं हट सका। जिला कलेक्टर से लेकर राष्ट्रपति भवन तक गुहार लगाने के बावजूद प्रशासनिक लापरवाही ने पीड़ित को न्याय से वंचित रखा है।

 

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