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लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
दूसरे नवरात्र पर पूजा
रितु मेहरा
हिंदू धर्मालंबी नवरात्रों में दूसरे नवरात्रि को यानी आज के दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना करते हैं । शारदीय नवरात्र के द्वितीय दिन माता ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है।
मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप अत्यंत ही सौम्य और तेजस्वी है। इनके दाहिने हाथ में जपमाला और बाएँ हाथ में कमंडल रहता है। मां तपस्या और संयम की प्रतिमूर्ति मानी जाती हैं।
प्रसिद्ध मंदिर
वाराणसी (उत्तर प्रदेश) – यहां स्थित दुर्गा मंदिर और काशी क्षेत्र में मां ब्रह्मचारिणी की विशेष पूजा होती है।
गुजरात और मध्यप्रदेश में भी माता ब्रह्मचारिणी के छोटे-छोटे प्राचीन मंदिर मिलते हैं, जहां नवरात्र पर विशेष आयोजन होते हैं।
जयपुर (राजस्थान) – शहर के कई शक्ति पीठों में दूसरे नवरात्र को ब्रह्मचारिणी की विशेष आराधना की जाती है।
पूजा का विधान
1. सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनकर व्रत का संकल्प लें।
2. माता ब्रह्मचारिणी की प्रतिमा या चित्र को गंगाजल से शुद्ध करें।
3. फूल, अक्षत, रोली, चंदन, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
4. जपमाला और कमंडल अर्पित करना विशेष फलदायी माना जाता है।
5. माता के मंत्र “ॐ ब्रह्मचारिण्यै नमः” का जप करें।
6. दिनभर संयम और नियमपूर्वक उपवास रखें।
पूजा का महत्व और लाभ
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से साधक को तप, त्याग, सदाचार और संयम की शक्ति प्राप्त होती है।
विद्यार्थी और साधना करने वाले व्यक्तियों के लिए यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है।
पूजा करने से आत्मविश्वास, मानसिक शांति और लक्ष्य प्राप्ति में सफलता मिलती है।
मान्यता है कि मां की कृपा से अविवाहित कन्याओं को योग्य वर की प्राप्ति होती है और दांपत्य जीवन में सुख-शांति आती है।
दूसरे नवरात्र पर मां ब्रह्मचारिणी की आराधना से साधक को जीवन के कठिन मार्गों पर सफलता मिलती है और वह तपस्या के मार्ग पर अग्रसर होकर अपने उद्देश्य की प्राप्ति करता है।
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