मां और प्रेमी ने क्यों की जुड़वां बेटों की हत्या!

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

जुड़वां बेटों की हत्या के बाद मां का विलाप, जांच में खुला खौफनाक राज!

डीग के बड़ेसरा गांव में दोहरे हत्याकांड से सनसनी, विनय-विष्णु की मौत के मामले में मां प्रीति और प्रेमी राजेश पर हत्या का आरोप

भरतपुर। राजस्थान के डीग जिले के जनूथर थाना क्षेत्र के बड़ेसरा गांव में दो मासूम जुड़वां भाइयों की हत्या के मामले ने हर किसी को झकझोर दिया। जिन बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी मां पर थी, उन्हीं की हत्या के आरोप में मां प्रीति और उसके कथित प्रेमी राजेश का नाम सामने आने से मामला और भी गंभीर हो गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि बच्चों की मौत के बाद प्रीति लोगों के सामने दहाड़ें मारकर रोती रही, लेकिन पुलिस जांच में सामने आए तथ्यों ने पूरे घटनाक्रम पर सवाल खड़े कर दिए।

मातम के बीच शक, जांच में सामने आया कथित षड्यंत्र

मृतक जुड़वां बच्चों की पहचान विनय और विष्णु के रूप में हुई है। शुरुआती तौर पर यह मामला बच्चों की मौत का था, लेकिन पुलिस जांच आगे बढ़ने के साथ संदेह की दिशा बदली। आरोप है कि प्रीति ने अपने कथित प्रेमी राजेश के साथ मिलकर वारदात को अंजाम दिया। बताया जा रहा है कि अपराध का खुलासा होने के डर से बच्चों को निशाना बनाया गया। हालांकि, हत्या की सटीक परिस्थितियों, भूमिका और मकसद की पुष्टि पुलिस की आधिकारिक जांच तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही की जानी चाहिए।

आंसुओं के पीछे छिपा था राज?

बच्चों की मौत के बाद मां का फूट-फूटकर रोना और फिर उसी पर हत्या में शामिल होने का आरोप लगना इस मामले का सबसे विचलित करने वाला पहलू है। सार्वजनिक रूप से व्यक्त किया गया शोक अपने आप में किसी की संलिप्तता या निर्दोषता का प्रमाण नहीं होता। असल सवाल यह है कि जांच में ऐसे कौन से तथ्य सामने आए, जिनके आधार पर पुलिस का संदेह मां और उसके कथित साथी तक पहुंचा।

चंद घंटों में खुलासे का दावा

मिली जानकारी के अनुसार, जनूथर थाना पुलिस ने मामले की जांच करते हुए कुछ ही घंटों में हत्याकांड का खुलासा किया और आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस की कार्रवाई इस मामले में अहम मानी जा रही है। अब जांच में सामने आए साक्ष्य, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य परिस्थितिजन्य तथ्यों के आधार पर अदालत में आरोपों को साबित करना महत्वपूर्ण होगा।

दो मासूमों की मौत ने कई सवाल छोड़े

विनय और विष्णु की मौत केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और उनके प्रति वयस्कों की जिम्मेदारी पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। किसी भी रिश्ते या निजी विवाद का खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़े, यह अस्वीकार्य है। इस मामले में भावनात्मक प्रतिक्रियाओं से आगे बढ़कर जरूरी है कि जांच के सभी तथ्य सामने आएं और दोष सिद्ध होने पर कानून के अनुसार सजा मिले।

बड़ेसरा का यह मामला जितना हृदयविदारक है, उतना ही जरूरी है कि इसे सनसनी के बजाय तथ्यों के आधार पर देखा जाए। दो मासूमों की मौत के पीछे की पूरी सच्चाई सामने आना और जिम्मेदार लोगों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत सजा मिलना ही पीड़ित बच्चों के लिए वास्तविक न्याय होगा।

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