-हाईकोर्ट ने शिक्षा को लेकर सरकारों से मांगा व्यापक एक्शन प्लान

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

“2047 का भारत बनाने वाले बच्चों को बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा चाहिए”-

पेपर लीक, स्क्रीन टाइम, बेरोजगारी और स्कूलों की बदहाल व्यवस्था पर भी उठाए सवाल

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने देश और प्रदेश की आने वाली पीढ़ियों—Gen-Z, Gen-Alpha और Gen-Beta—के भविष्य, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहल करते हुए स्वप्रेणा प्रसंज्ञान लिया हैं.

जस्टिस अनूप कुमार ढंड ने स्वप्रेणा प्रसंज्ञान में कहा कि आज के बच्चे ही भविष्य में देश के कार्यबल, नेतृत्व और समाज की जिम्मेदारी संभालेंगे और उन्हें मिलने वाली शिक्षा एवं सुविधाएं ही भारत के भविष्य की दिशा तय करेंगी।

हाईकोर्ट ने विशेष रूप से ग्रामीण और सरकारी स्कूलों की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई और कहा कि एक ओर देश वर्ष 2047 और उसके बाद के भारत का नेतृत्व करने वाली नई पीढ़ी को तैयार करने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर इन बच्चों की बुनियादी शिक्षा से जुड़ी संस्थाएं बुनियादी ढांचे, प्रशिक्षित शिक्षकों, चिकित्सा सुविधाओं, शौचालयों और आधुनिक तकनीक जैसी आवश्यक सुविधाओं की कमी से जूझ रही हैं।

कोर्ट ने मामले को जनहित याचिका के रूप में दर्ज करते हुए केंद्र सरकार, राजस्थान सरकार, FSSAI और अन्य संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर स्टेटस रिपोर्ट और व्यापक एक्शन प्लान पेश करने के आदेश दिए हैं।

स्कूलों में चिप्स, कोल्ड ड्रिंक और जंक फूड पर सख्ती
राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने आदेश में बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर भी बड़ा रुख अपनाया है।

कोर्ट ने कहा कि वर्ष 2020 में बच्चों के लिए सुरक्षित और संतुलित भोजन को लेकर बनाए गए नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए हैं।

कोर्ट ने अंतरिम रूप से निर्देश दिया है कि राजस्थान के किसी भी स्कूल में कार्बोनेटेड ड्रिंक्स, चिप्स, ट्रांस-फैट वाले बेकरी उत्पाद और High Fat, Sugar & Salt (HFSS) श्रेणी के खाद्य पदार्थ नियमों के उल्लंघन में नहीं बेचे जाएं।

साथ ही राज्य को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि स्कूल कैंटीन या स्कूल के गेट से 50 मीटर के दायरे में HFSS खाद्य पदार्थों की बिक्री नहीं हो। जिला प्रशासन और ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों को इसके लिए नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं।

हर स्कूल कैंटीन में कैलोरी और पोषण की जानकारी
हाईकोर्ट ने स्कूलों को आठ सप्ताह के भीतर कैंटीन के भोजन की कैलोरी, सामग्री और पोषण संबंधी जानकारी प्रदर्शित करने के निर्देश दिए हैं।

इसके साथ ही ‘ट्रैफिक लाइट लेबलिंग’ अपनाने की बात भी कही गई है, ताकि बच्चों और अभिभावकों को खाद्य पदार्थों के पोषण स्तर की जानकारी आसानी से मिल सके।

हर स्कूल में चार सप्ताह के भीतर School Food Safety and Nutrition Committee गठित करने के निर्देश दिए गए हैं, जिसमें शिक्षक, अभिभावक और विद्यार्थियों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

Gen-Z की आवाज बनेंगे वरिष्ठ और युवा अधिवक्ता,
राजस्थान हाईकोर्ट ने आने वाली पीढ़ियों Generation Z, Generation Alpha और Generation Beta से जुड़े मुद्दों पर महत्वपूर्ण आदेश देते हुए अलग-अलग अधिवक्ताओं के समूह से न्यायालय की सहायता करने का अनुरोध किया है।

कोर्ट ने Generation Z की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रवि भंसाली, सचिन आचार्य और विकास बालिया को मामले में न्यायमित्र नियुक्त किया हैं.

वहीं, Generation Alpha की ओर से अधिवक्ता पंकज शर्मा, प्रियंका बोराणा, नमन माहेश्वरी और अविन छंगाणी न्यायालय की सहायता करेंगे।

Generation Beta के मुद्दों पर अधिवक्ता अदिति मोदी, अक्षिति सिंघवी, निधि सिंघवी और अभिलाषा बोरा को न्यायालय की सहायता करने का अनुरोध करते हुए न्यायमित्र नियुक्त किया हैं.

इसके अलावा, केंद्र और राज्य सरकार की ओर से संबंधित पक्षों का प्रतिनिधित्व करने के लिए ASG भरत व्यास, (Additional Solicitor General) और राजेंद्र प्रसाद, एडवोकेट जनरल को भी उपस्थित रहने का अनुरोध किया है।

हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि इन सभी अधिवक्ताओं और उनके सहयोगी वकीलों के नाम कॉज लिस्ट में प्रदर्शित किए जाएं तथा आदेश की प्रति उन्हें सूचना के लिए भेजी जाए।

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