भव्य कलश यात्रा के साथ श्री भक्तमाल महाकथा का शुभारंभ

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

पादूकलां (राकेश उपाध्याय)। निकटवर्ती ग्राम लांपोलाई में रविवार को सात दिवसीय श्री भक्तमाल महाकथा का शुभारंभ भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ। साधु-संतों के सानिध्य में निकाली गई इस यात्रा में महिलाओं, युवाओं एवं श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। भीषण गर्मी के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह देखते ही बन रहा था।

चारभुजानाथ मंदिर से प्रारंभ हुई कलश यात्रा में सैकड़ों महिलाएं सोलह श्रृंगार कर सिर पर मंगल कलश धारण किए मंगल गीत गाते हुए शामिल हुईं। डीजे पर बज रहे भक्ति गीतों और भगवान के जयकारों के बीच श्रद्धालु गांव के प्रमुख मार्गों से होते हुए कथा स्थल श्री श्याम गौशाला पहुंचे। यात्रा मार्ग में विभिन्न स्थानों पर ग्रामीणों ने पुष्पवर्षा कर श्रद्धालुओं का स्वागत किया।

कथा स्थल पर गौभक्तों एवं ग्रामीणों ने कलश यात्रा का भव्य अभिनंदन किया। इस दौरान संत-महात्माओं का राजस्थानी परंपरा के अनुसार साफा, दुपट्टा एवं माल्यार्पण कर सम्मान किया गया। पूरा वातावरण हरिनाम संकीर्तन और भक्ति रस से सराबोर रहा।

महाकथा के प्रथम दिवस कथावाचक संत सुखदेवजी महाराज ने भक्तमाल ग्रंथ की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि संतों और भक्तों का जीवन समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि सत्संग मनुष्य के जीवन को नई दिशा प्रदान करता है तथा भक्ति ही परमात्मा तक पहुंचने का सबसे सरल मार्ग है।

इस अवसर पर भामाशाह सत्यनारायण जांगिड़ ने श्री भक्तमाल महाकथा के लिए 2 लाख 11 हजार 11 रुपए की श्रद्धाभेंट अर्पित की। आयोजन समिति एवं संत-महात्माओं द्वारा उनका सम्मान किया गया।

कार्यक्रम में संत लक्ष्मणदास महाराज, जगदीशदासजी महाराज सहित अनेक संत-महात्माओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। श्री श्याम सेवा समिति लांपोलाई के पदाधिकारी, गौभक्त, महिला शक्ति एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

संत श्री पांचारामजी महाराज के सानिध्य में आयोजित यह सात दिवसीय महाकथा आगामी दिनों में धर्म, संस्कार, भक्ति और मानवता का संदेश प्रदान करेगी।

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