बैरवा महासभा ने 80 वर्ष के कार्यकाल में देखे अनेक उतार- चढ़ाव

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आजादी से भी पहले की है  अखिल भारतीय बैरवा महासभा        

यह सर्व विदित है कि किसी भी समाज का विकास शिक्षा और संगठन के बिना संभव नहीं है इसीलिए अखिल भारतीय बैरवा के नाम से हमारे समाज के बुद्धिजीवियों ने 29 अप्रैल 1946 से पंजीकृत करवा कर विधिक रूप से मान्यता दिलाई गई । इस वर्ष अखिल भारतीय बैरवा महासभा पंजीकृत S-277 जेएससी 29/04/1946 का 80 वां स्थापना दिवस मनाया जा रहा है ।
बैरवा समाज के बुद्दिजीवियों ने 80 साल पहले किया था अखिल भारतीय बैरवा महासभा का गठन
महासभा की 80 वीं वर्षगांठ के अवसर पर हम उन  सभी वरिष्ठ समाज सेवियों, संत विवेक दास जी महाराज,  मुनीश्वरानंदजी,  हरिशंकर सिद्धांत शास्त्री स्वामी हीरा भारती  मास्टर झूंथालाल शिव प्रसाद  मरमट हरिहरानंद त्यागी जी महाराज, मधुकर मरमट,  सोहनलाल बंसीवाल, समझानंद  महाराज सहित समाज के उन सभी वरिष्ठ समाजसेवी एवं बुद्धिजीवियों को  याद करते है । जिनका बैरवा समाज की स्थापना में बड़ा योगदान रहा।
अखिल भारतीय बैरवा महासभा का संविधान बना हुआ हैl संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार निर्धारित अवधि 3 वर्ष के बाद राष्ट्र, प्रदेश, जिला, एवं तहसील स्तर पर लोकतांत्रिक व्यवस्था से चुनाव करवा कर राष्ट्र प्रदेश जिला एवं तहसील स्तरीय कार्यकारिणी का गठन किया जाता है । इन समस्त इकाइयों के मुख्य पदाधिकारीगण यथा राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष, जो  संगठन का सर्वोच्च पदाधिकारी माना जाता है तथा समाज के प्रथम व्यक्ति के नाम से पहचाना जाता है । अध्यक्ष के निर्देशानुसार प्रशासनिक गतिविधियों के क्रियान्वयन, पत्राचार करने कार्यक्रमों के संयोजन करने हेतु महामंत्री के पद की भी व्यवस्था की गई है ।लोकतांत्रिक प्रक्रिया से चुने हुए अध्यक्ष महामंत्री आपसी सलाह मशविरा से संवैधानिक मानदंडों के अनुसार कार्यकारिणी का गठन करते हैं ।
संगठनात्मक ढांचा:–
अखिल भारतीय बैरवा महासभा की संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार  (१) राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय महामंत्री,एवं -राष्ट्रीय कार्यकारिणी  (२) प्रदेश स्तर पर- प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश महामंत्री, एवं प्रदेश कार्यकारिणी  (३)  जिला स्तर पर जिलाअध्यक्ष, जिला महामंत्री  एवं  जिला कार्यकारिणी  (४) तहसील स्तर पर -तहसील अध्यक्ष तहसील महामंत्री, एवं तहसील कार्यकारणी  का  गठन किया जाता है ।
2. शैक्षणिक योग्यता की आवश्यकता:

यद्यपि अखिल भारतीय बैरवा महासभा के संविधान में राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं महामंत्री पद की पात्रता के लिए शैक्षणिक योग्यता का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया हुआ है, फिर भी वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार राष्ट्रीय अध्यक्ष राष्ट्रीय महामंत्री पद के लिए सुशिक्षित, संपन्न, समाज हित और समाज के संगठनों को ध्यान में रख कर समाज को एक सूत्र में बांधने का प्रयास करने वाले और संगठन को संवैधानिक परिपेक्ष में निर्णय लेने  की विवेक क्षमता होनी आवश्यक है ।
साथ ही आजकल समाज में कुकरमुत्तौ की ‘ तरह पद लोलुप लोगों द्वारा रोज रोज नए-नए संगठन पैदा हो रहे हैं,उन सबको एक सूत्र में बांध कर समाज में एकता और भाई चारा कायम रखने की क्षमता भी होनी आवश्यक है ।    ४.सदस्यता का प्रकार एवं सदस्यता राशि:- संविधानिक व्यवस्था  के अनुसार
मुख्य रूप से तीन प्रकार के सदस्य होते हैं:—
१. संरक्षक सदस्य   (आजीवन) २. आजीवन सदस्य  (आजीवन) ३.साधारण सदस्य वर्ष के लिए वैध सबका सदस्यता शुल्क अलग – अलग है।  इसमें समय- समय पर राष्ट्रीय नेतृत्व बदलाव करता रहता है।

.अखिल भारतीय बैरवा महासभा का मुख्य उद्देश्य :-

समाज में शिक्षा का प्रचार प्रसार,छात्रावासों का निर्माण करवाकर संचालन करवाना, लाइब्रेरीयों  की स्थापना करवाना, ,समाज में व्याप्त कुरीतियों यथा मृत्यु भोज, कपड़ों की सीमित पहरावनी , तीये की बैठक में  भोजन नाश्ता एवं बर्तन बांटने पर प्रतिबंध, दहेज मुक्त शादी करवाने का प्रयास, आदि कुरीतियों को जड़ मूल से समाप्त करने का प्रयास करना! शादी विवाह में कम खर्च  के लिए  सामूहिक विवाह सम्मेलनों में शादी विवाह करवाने का प्रचार प्रसार करना, समाज में भाईचारा और एकता कायम रखना ।समाज पर आए दिन हो रहे अत्याचारों पर अंकुश लगाना तथा आवश्यक कानूनी करवा कर पीड़ित को उचित न्याय दिलवाना ।समाज के व्यक्तियों को राजनीति में पर्याप्त हिस्सेदारी दिलवाने का प्रयास करना ।

महासभा  की 80 वर्षों की संगठनात्मक यात्रा
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(१)  29/04/1946 से 9/1955 तक की अवधि में संस्था के प्रथम राष्ट्रीय अध्यक्ष संत विवेक दास  रहे राष्ट्रीय महामंत्री  शिव प्रसाद जी मरमट रहे ।

(२)     अक्टूबर 1955 से दिसंबर 1968 तक राष्ट्रीय अध्यक्ष मास्टर झूंथालालजी जारवाल एवं  राष्ट्रीय महामंत्री के पद पर  शिव प्रसाद मरमठ तथा  हरीशंकर सिद्धांत शास्त्रीजी रहे ।
(३)     जनवरी 1969 से दिसंबर 1975 तक राष्ट्रीय अध्यक्ष  ओंकारमल बैरवा, राष्ट्रीय महामंत्री के पद पर श्री हरिशंकर सिद्धांतशास्त्री जी रहे ।
(४)     जनवरी 1976 से 7 सितंबर 2002 तक राष्ट्रीय अध्यक्ष  मधुकर मरमठ ,राष्ट्रीय महामंत्री शिव प्रसाद मरमठ रहे ।
(५)     8 सितंबर 2002 से 8 अक्टूबर 2011 तक लगभग 9 वर्ष  लक्ष्मीनारायण  बैरवा पूर्व संसदीय सचिव  राजस्थान सरकार, राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर रहे, उनके साथ 2004 तक राष्ट्रीय महामंत्री के पद पर महंत गजराज भारती एवं 2005 से श्री रतनलाल बैरवा रहे ।
(६)     9 अक्टूबर 2011 से 8 अक्टूबर2022 तक राष्ट्रीय अध्यक्ष पर  हरिनारायण बैरवा (सेवानिवृत्ति अतिरिक्त आयुक्त, परिवहन विभाग राजस्थान) एवं राष्ट्रीय महामंत्री के पद पर  रतनलाल  बैरवा रहे ।
(७)     9 अक्टूबर 2022 से 4 अक्टूबर 2025 तक  राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर  ललित कुमार बैरवा एवं राष्ट्रीय महामंत्री के पद पर मुंशीराम कुंडारा रहे ।
(८)     5 अक्टूबर 2025 को राष्ट्रीय अध्यक्ष, एवं राष्ट्रीय महामंत्री, प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश महामंत्री राजस्थान, के पद पर लोकतांत्रिक प्रणाली से जयपुर में चुनाव संपन्न हुए, जिसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष पर  रामदयाल बड़ोदिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री पद पर  रामनिवास जोनवाल प्रदेश अध्यक्ष पद पर  ओम प्रकाश वर्मा मूर्तिकार एवं प्रदेश महामंत्री पद पर श्री अमरचंद  बैरवा लाका निर्वाचित हुए ।
(७)   समीक्षात्मक टिप्पणी:
.अक्टूबर 2011 में उज्जैन में प्रथम बार लोकतांत्रिक प्रणाली से चुनाव हुए थे जिसमें   हरिनारायण बैरवा राष्ट्रीय अध्यक्ष,एवं श्री रतनलाल बैरवा राष्ट्रीय महामंत्री के पद पर निर्वाचित हुए । उनके 11 वर्षीय  कार्यकाल में युवा वर्ग में अधिक जागृति आई, क्योंकि, हा राजस्थान प्रदेशअध्यक्ष  कजोडमल बैरवा प्रदेश महामंत्र ऍडवोकेट मोहनप्रकाश बैरवा पूर्व प्रदेश महामंत्री  रामकुमार वर्मा (पूर्व सांसद राज्यसभा) एवं उनकी कार्यकारणी के सभी पदाधिकारीयों में सहयोगात्मक रवैया एवं सामंजस्य रहने के कारण इस अवधि में तहसील स्तर पर ग्रामीण स्तर पर सदस्यता अभियान चलाकर महासभा की सदस्य संख्या बढ़ाई गई । समाज में व्याप्त कुरीतियों यथा (मृत्यु भोज, तिए की बैठक में खाना)को छुड़वाने का पर्याप्त प्रयास किया गया ,जो सफल भी रहा । राजनीतिक क्षेत्र में भी उचित प्रतिनिधित्व दिलवाने का पूर्ण प्रयास किया गया । मध्य प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान के मुख्य शहरों में बैरवा समाज के संत और महापुरुषों के नाम से मुख्य मार्गों, का नामकरण करवाया गया तथा मदनगीर दिल्ली में बैरवा रत्न ” कन्हैयालाल भागवत मार्ग” का नामकरण करवाया गया,  राजस्थान की राजधानी जयपुर में सांगानेर एयरपोर्ट सर्किल से एयरपोर्ट बाउंड्री से गुजरते हुए जगतपुरा रोड,7 नंबर बस स्टैंड तक का नामकरण 16 नवंबर 2019 को “महर्षि बालीनाथजी महाराज मार्ग” के नाम से  करवाया गया । मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में “संत बालीनाथ चौराहा”, “संत बालीनाथ घाट”, “संत बालीनाथ उद्यान”, “संत बालीनाथ धर्मशाला”,आदि का नामकरण करवाया गया । महर्षि बालनाथ बोर्ड के गठन की मांग की गई थी बोर्ड गठन के आदेश तो राज सरकार द्वारा कर दिए गए हैं, परंतु  क्रियान्विति राज्य सरकार के स्तर पर अभी भी लंबित है । बैरवा महासभा के भवन के लिए भी मांग रखी गई थी जो आज तक भी लंबित है । जयपुर एवं दिल्ली में बैरवा भवन निर्माण करवाया जाना आवश्यक है ।
इस संबंध में स्मरण कराया जाना आवश्यक है कि गत चुनाव के दौरान राष्ट्रीय महामंत्री के पद के प्रत्याशी  मुंशीराम कुंडारा द्वारा जारी चुनावी घोषणा पत्र द्वारा आश्वस्त किया गया था कि यदि मैं चुनाव जीत जाता हूं तो दिल्ली और जयपुर में  बैरवा भवन बनवा दूंगा परन्तु मुंशीलाल कुंडारा जी तत्कालीन राष्ट्रीय महामंत्री द्वारा की गई घोषणा की क्रियान्विति भी लंबित रही।  हरिनारायण बैरवा जी के कार्यकाल में लोगों के साथ अत्याचार के मामलों में  समय-समय पर सरकार पर दबाव बनाकर आवश्यक कार्रवाई करवाई गई । अत्याचार निवारण समिति, समझौता समिति, जैसी कई समितियां गठित की गई ।समाज में भाईचारा और एकता बनाए रखने का पूर्ण प्रयास किया गया । अखिल भारतीय बैरवा महासभा के 80 वें स्थापना दिवस पर उन सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं जिन्होंने आजादी से पूर्व 1946 में जो पौधा लगाया था वह आज वटवृक्ष बन चुका है ।

नोट :-भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(१) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकारों के तहत मैंने मेरे व्यक्तिगत विचार व्यक्त किए हैं । इस संबंध में किसी को कोई परेशानी हो तो  वे लेखक से व्यक्तिकगत संपर्क कर सकते है।

लेखक –  बाबूलाल महुआ,
समाज सेवी एवं चिंतक

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