लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
भरतपुर। गैस सिलेंडर की आपूर्ति को लेकर फैल रही अफवाहों के बीच जिला कलेक्टर कमर चौधरी ने स्पष्ट किया है कि जिले में एलपीजी की स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए भारत सरकार ने एलपीजी को लेकर कुछ कंट्रोल मेजर लागू किए हैं, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
कलेक्टर ने बताया कि हाल ही में कुछ गैस एजेंसियों के सर्वर फ्लैश होने से एक दिन तकनीकी समस्या आई थी, लेकिन अब यह समस्या पूरी तरह समाप्त हो चुकी है और उपभोक्ता सामान्य रूप से ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं। बुकिंग के बाद यदि उपभोक्ता के पास एक सिलेंडर है तो डेढ़ से दो दिन में नया सिलेंडर मिल जाएगा, जबकि दो सिलेंडर वाले उपभोक्ताओं को दो से तीन दिन में सप्लाई उपलब्ध करा दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि यदि किसी उपभोक्ता ने एक सिलेंडर ले लिया है और दूसरा सिलेंडर लेना चाहता है तो उसे 25 दिन बाद ही बुकिंग करनी होगी। यह व्यवस्था सभी उपभोक्ताओं तक गैस का समान वितरण सुनिश्चित करने और कालाबाजारी व जमाखोरी पर रोक लगाने के लिए लागू की गई है।
जिला कलेक्टर के अनुसार भरतपुर जिले में प्रतिदिन करीब 5 हजार से 5 हजार 500 घरेलू गैस सिलेंडरों की खपत होती है। जिले में तीनों कंपनियों—आईओसीएल, एचपीसीएल और बीपीसीएल—के पर्याप्त सिलेंडर उपलब्ध हैं और बॉटलिंग प्लांट से नियमित रूप से आपूर्ति हो रही है।
कलेक्टर ने आमजन से अपील की कि गैस एजेंसियों पर लाइन लगाने की आवश्यकता नहीं है। उपभोक्ता केवल बुकिंग कराएं, उन्हें समय पर सिलेंडर उपलब्ध कराया जाएगा।
उन्होंने बताया कि शिकायतों के निस्तारण के लिए एमपीएनजी का राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम और जिला कंट्रोल रूम सक्रिय हैं। साथ ही जिले में एक निगरानी समिति भी गठित की गई है, जो गैस एजेंसियों पर जाकर जांच करेगी और किसी भी तरह की अनियमितता पर कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।
कमर्शियल गैस सिलेंडरों के संबंध में कलेक्टर ने बताया कि भारत सरकार के निर्देशानुसार फिलहाल कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई पर रोक लगाई गई है, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं को निर्बाध गैस उपलब्ध हो सके।
कलेक्टर कमर चौधरी ने कहा कि भरतपुर में एलपीजी की स्थिति पूरी तरह सामान्य है और लोगों को अफवाहों से बचते हुए किसी भी तरह की पैनिक करने की आवश्यकता नहीं है। किसी भी समस्या की स्थिति में उपभोक्ता सीधे जिला प्रशासन को सूचना दे सकते हैं।















































