लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
पादूकलां। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर जाट समाज पादूकलां ने श्री सूरजपुरी महाराज के स्थान पर आयोजित सामाजिक बैठक में सादगी और समानता को बढ़ावा देने वाले महत्वपूर्ण निर्णय लिए।
जाट समाज से समाज में बढ़नी दहेज प्रथा और
मायरा भरने के दौरान जिस तरह से लाखों करोड़ों रुपए खर्च किया जा रहा है सैकड़ो लोगों के कपड़े दिए जाते हैं । मेहंदी की रस्म के नाम पर हो रही फिजूल खर्ची ,प्री वेडिंग के नाम पर बेहूदा प्रदर्शन नुक्ता प्रथा के नाम पर होने वाले खर्चों पर नियंत्रण के साथ अब शादी समारोह में लेनदेन पर पाबंदी लगाने का पंच पटेलो ने निर्णय किया है। जाट समाज के पदुकला में समाज की पंचायत में दहेज के तौर पर अधिकतम लड़की को पांच तोला सोना ही दिया जाएगा। वही लड़के वालों से भी होने वाली बहू के लिए मात्र पांच तोले सोने के जेवरात ही मंगवाए जाएंगे । इससे ज्यादा जेवरातों का सार्वजनिक प्रदर्शन नहीं किया जा सकेगा। यह निर्णय जाट समाज ने समाज में बढ़ती दहेज प्रथा को देखते हुए लिया है। जिसका सभी ने स्वागत किया है। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ समय से विवाह समारोह में लोग 20-20 25-25 तोला सोना ,कई किलो चांदी देने का काम कर रहे हैं ,जिससे बहुत से गरीब लोगों के सामने शादी समारोह करने का संकट सा खड़ा हो गया है । तमाम लोगों की समस्याओं को समझते हुए जाट समाज ने इस पर नियंत्रण लगाते हुए अब विवाह में सिर्फ दोनों तरफ से अधिकतम 5-5 तोला सोने के आभूषण देने का निर्णय हुआ है, जिसका समाज के सभी लोगों ने स्वागत किया है।
बैठक में तय किया गया कि विवाह में बर्तन बांटने की प्रथा, मायरा (भात) में भव्यता, मृत्युभोज में कपड़ों का लेन-देन और हल्दी-मेहंदी जैसी भव्य रस्मों को सीमित करने पर सहमति बनी।
समाज के वरिष्ठजनों ने कहा कि इन निर्णयों का उद्देश्य आर्थिक बोझ कम करना, सामाजिक समानता बढ़ाना और छोटे-बड़े परिवारों के बीच भेदभाव समाप्त करना है। बैठक के अंत में सभी ने सादगी और समाज में एकता बनाए रखने का संकल्प लिया।















































