कंटेंट : राखी जैन वरिष्ठ पत्रकार- फोटो : योगेश शर्मा वरिष्ठ फोटो जनर्लिस्ट

राजस्थान के बाड़मेर जिले में स्थित किराडू मंदिर समूह किसी अजंता-एलोरा से कम नहीं। यहां की नक्काशी, स्थापत्य शैली और रहस्यमयी कहानियां मिलकर इसे एक अनमोल और रहस्यमय पर्यटन स्थल बना देती हैं। अगर आप राजस्थान में कुछ भीड़ से हटकर और अद्भुत देखना चाहते हैं, तो किराडू ज़रूर आइए। इन दक्षिण भारतीय शैली के मंदिरों को राजस्थान का खजुराहो भी कहा जाता है। बाड़मेर जिले में स्थित ये किराडू मंदिर अपनी शिल्प कला के लिए काफी प्रसिद्ध हैं. यह पांच मंदिरों की एक श्रृंखला है।

थार की गोद में छिपा खजाना
बाड़मेर से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित ये मंदिर समूह एक समय में शैव और वैष्णव उपासकों का बड़ा केंद्र था। माना जाता है कि ये मंदिर 11वीं–12वीं शताब्दी के बीच परमार वंश के शासनकाल में बने थे। इन मंदिरों की वास्तुकला सोलंकी शैली की है, जो गुजराती मंदिरों से मिलती-जुलती लगती है।

स्थापत्य कला जो समय को चकित कर दे
मंदिरों की दीवारों, स्तंभों और गर्भगृह के बाहर की गई जटिल और गूढ़ नक्काशी देखने लायक है। मुख्य शिव मंदिर के अलावा यहाँ कई छोटे-बड़े मंदिरों के भग्नावशेष हैं – जिनमें विष्णु, गणेश, सूर्य और देवी की मूर्तियाँ थीं। इनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि – ये मंदिर आज भी अपनी नक्काशी, अनुपात और संरेखण (alignment) में भव्यता बनाए हुए हैं, बावजूद इसके कि कई हिस्से ध्वस्त हो चुके हैं। ज्यादातर मंदिर अब खंडहर हो चुके हैं। स्थापत्य कला के लिए मशहूर इन प्राचीन मंदिरों को देखकर ऐसा लगता है मानो शिल्प और सौंदर्य के समन्दर में गोते लगा रहे हों। पत्थरों पर बनी कलाकृतियां अपनी अद्भुत और बेमिसाल अतीत की कहानियां कहती नजर आती हैं। 
किराडू का रहस्य – सूरज ढले न रुको.
किराडू मंदिर सिर्फ स्थापत्य की दृष्टि से नहीं, बल्कि अपनी रहस्यमय लोककथाओं के कारण भी प्रसिद्ध है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार –“सूर्यास्त के बाद यहाँ कोई नहीं रुकता।” कहा जाता है कि यहाँ एक समय एक तपस्वी ऋषि निवास करते थे। उनके अपमान के कारण यह स्थान श्रापित हो गया और तब से रात में यहाँ विचित्र घटनाएं घटती हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण कुछ भी कहे, लेकिन स्थानीय लोग आज भी सूर्यास्त से पहले मंदिर खाली कर देते हैं। यदि सरकार और पुरातत्व विभाग किराडू के विकास पर ध्यान दे तो यह जगह एक बेहतरीन पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो सकती है।

लेंसमैन Yogesh Sharma की नजरों से
Yogesh Sharma की तस्वीरों में किराडू के मंदिर सिर्फ पत्थर नहीं, बल्कि भावनाओं और समय के संवाद बनकर सामने आते हैं।
क्यों जाएं किराडू?
अगर आपको इतिहास और रहस्य दोनों पसंद हैं,अगर आप भारत की कम चर्चित लेकिन आश्चर्यजनक धरोहरों को देखना चाहते हैं, और अगर आप थार के सीने में छुपे उस खजाने को देखना चाहते हैं, तो किराडू आपके इंतज़ार में है। आज की ट्रेवल डायरी में बस इतना ही अगले हफ्ते फिर मिलेंगे राजस्थान के और खुबसूरत टूरिस्ट डेस्टिनेशन के साथ। 








































