लोक टुडे न्युज़ नेटवर्क
श्रीराम कथा के पंचम दिवस में वन गमन और राम-भरत मिलन प्रसंग ने भिगोए श्रोता के नयन
गौतम शर्मा, राजसमंद।
“क्षण भंगुर जगत में न सुख स्थायी है, न दुख” — इस गूढ़ सत्य का संदेश देते हुए साध्वी सुहृदय दीदी ने कहा कि संसार में कुछ भी स्थाई नहीं है। हर परिस्थिति — चाहे वह अच्छी हो या बुरी — समय के साथ बीत जाती है। उन्होंने कहा कि जीवन में साक्षी भाव अपनाएं और मन को वश में करने के लिए साधु-संतों का संग तथा सत्संग आवश्यक है, क्योंकि समय किसी के लिए नहीं रुकता।
राम नाम में है अद्भुत शक्ति
श्रीराम कथा के पंचम दिवस की शुरुआत भजन —
“कहीं राम लिख दिया है, कहीं श्याम लिख दिया है,
सांसों के हर सिरे पर तेरा नाम लिख दिया है…”
— से हुई। इस अवसर पर साध्वी सुहृदय दीदी ने कहा कि राम नाम में अपार शक्ति निहित है। जिसके मन में राम बसते हैं, उसकी बुद्धि को ज्ञान की देवी सरस्वती भी विचलित नहीं कर सकती।
वन गमन और राम-भरत मिलन ने भावविभोर किया
कथा के पंचम दिवस पर वन गमन और राम-भरत मिलन प्रसंग की भावपूर्ण व्याख्या के दौरान पूरा पांडाल विरह और प्रेम रस से सराबोर हो उठा।
“विधना तेरे लेख किसी की समझ न आते हैं,
जन-जन के प्रिय राम-लखन-सिया वन को जाते हैं…”
जैसे विरह गीत पर श्रोता भावुक हो उठे और वातावरण भक्ति से ओत-प्रोत हो गया।
सैकड़ों श्रद्धालु रहे उपस्थित
कथा के दौरान मीठालाल शर्मा, गिरीश अग्रवाल, ओम अग्रवाल, सुशीला साहू, राजकुमारी अग्रवाल, डॉ. विशाल लावटी, महेंद्र कोठारी, प्रवीण नंदवाना, राजेश सांगानेरिया, गिरिराज मुद्गल, राकेश गौड़, नाथूलाल तंबोली, धर्मेंद्र टेलर सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने व्यासपीठ की पूजा-अर्चना कर साध्वी सुहृदय दीदी से आशीर्वाद प्राप्त किया।

















































