लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
श्रीमद्भागवत गीता से युवा वर्ग को मिलती है जीवन दिशा — आचार्य रवि शंकर
बीकानेर | विजय कपूर की रिपोर्ट
बीकानेर | आचार्य रवि शंकर ने कहा कि आधुनिक युग की परिस्थितियों को देखते हुए इसे प्रतिस्पर्धाओं का युग कहा जा सकता है। ऐसे समय में योगेश्वर श्रीकृष्ण के उपदेश और श्रीमद्भागवत गीता की शिक्षाएं आज के समाज और विशेषकर युवा वर्ग के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि यदि युवा गीता के उपदेशों को अपने जीवन में आत्मसात करें, तो वे मानसिक द्वंद्व, तनाव और प्रतिस्पर्धा की चुनौतियों को पार कर सफलता प्राप्त कर सकते हैं।
आचार्य रवि शंकर प्रवचन के दौरान बोले कि श्रीकृष्ण समान मार्गदर्शक और गुरु की शिक्षाएं जीवन को सही दिशा देने में सहायक हैं। कृष्ण का दर्शन हमें कर्म, कर्तव्य और संतुलन का मार्ग दिखाता है।
समय और कर्म का सही उपयोग आवश्यक
आचार्य हरिप्रसाद जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि जीवन का प्रत्येक क्षण अनमोल और कीमती है, जिसका सदुपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्पादकता आवश्यक है, लेकिन उसमें केवल व्यक्तिगत स्वार्थ नहीं बल्कि समाज हित भी निहित होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण हमें जीवन को देखने की एक विशिष्ट दृष्टि प्रदान करते हैं। सामान्यतः प्रतिस्पर्धा दूसरों से की जाती है, जबकि अपने आप से की गई प्रतिस्पर्धा व्यक्ति को विकास की ओर ले जाती है, जिससे भीतर एक अलग प्रकार का चैतन्य उत्पन्न होता है।
द्वंद, राग और भय से बाहर निकलने का संदेश
प्रवचन में बताया गया कि श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं — द्वंद से बाहर निकलो, राग, क्रोध और भय को त्यागो। यही जीवन की सच्ची साधना है।
इस अवसर पर आचार्य कुलदीप ने अपनी मधुर वाणी से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करते हुए भजन “कृष्ण कहानी सुनो रे कृष्ण कहानी” प्रस्तुत किया। भजन के माध्यम से उन्होंने श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़ी शिक्षाओं को अपनाने की प्रेरणा दी।
समय प्रबंधन ही जीवन प्रबंधन
वक्ताओं ने कहा कि जिसे टाइम मैनेजमेंट नहीं आता, उसे लाइफ मैनेजमेंट भी नहीं आता। श्रीकृष्ण समय की उपयोगिता और सही समय पर सही कर्म करने का संदेश देते हैं।
उन्होंने गीता के उपदेश का उल्लेख करते हुए कहा— “कर्म की कुशलता का नाम ही योग है।”
प्रवचन के अंत में कहा गया कि सकारात्मक सोच ही जीवन के उद्देश्य को निर्धारित करती है। जब जीवन की दिशा सही होती है, तभी जीवन की दशा भी सुधरती है।











































