लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
अटल जी जोड़-तोड़ की राजनीति में विश्वास नहीं करते थे: वसुंधरा राजे
झालावाड़। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने गुरुवार को भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर याद किया। झालरापाटन स्थित लव कुश वाटिका में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने पौधारोपण भी किया। इस अवसर पर स्कूली बच्चों, समाजसेवी संस्थाओं और गणमान्य नागरिकों के सहयोग से 2,100 सागवान के वृक्ष लगाए गए।
वसुंधरा राजे ने अटलजी को याद किया
राजे ने अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व और उनके कार्यकाल के उल्लेखनीय योगदान को याद करते हुए कहा कि “अटल जी जोड़-तोड़ की राजनीति में विश्वास नहीं करते थे।” उन्होंने कहा कि अटल जी ने स्वर्णिम चतुर्भुज नदियों को जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया।
वसुंधरा ने साझा किया कि अटल जी के नेतृत्व में उन्हें मंत्री पद पर काम करने का अवसर मिला। पोखरण परमाणु परीक्षण के समय वे विदेश मंत्री थीं और उस चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में धैर्य बनाए रखना उन्होंने अटलजी से सीखा। उन्होंने कहा, “विदेश में जाकर विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के साथ व्यवहार करना और जवाब देना, अटलजी ने मुझे सिखाया।”
राजे ने अटलजी की प्रेरक पंक्तियों का भी उल्लेख किया:
“बाधाएं आती हैं आएं, घिरें प्रलय की घोर घटाएं, पावों के नीचे अंगारे, सिर पर बरसें यदि ज्वालाएं, निज हाथों में हंसते-हंसते, आग लगाकर जलना होगा। कदम मिलाकर चलना होगा।”
अटल वन और 11,000 पौधों का लक्ष्य
वसुंधरा ने झालरापाटन वासियों को अटल वन की सौगात दी और इस वर्ष 11,000 पौधे लगाने का लक्ष्य रखा। उन्होंने कहा कि अटलजी की दूरदर्शिता ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना जैसी योजनाओं की नींव रखी, जिन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साकार किया।
सांसद दुष्यंत सिंह का योगदान
कार्यक्रम में सांसद दुष्यंत सिंह ने बताया कि अटलजी जब पहली बार यूएन में संबोधन के लिए गए, तब उन्होंने हिंदी में भाषण दिया, जिसे सुनकर दुनिया के नेता खड़े होकर तालियों से उनका अभिनंदन किया।
कार्यक्रम में मनोहरथाना विधायक गोविंद रानी पुरिया, पूर्व विधायक नरेंद्र नागर, प्रदेश उपाध्यक्ष भाजपा छगन माहूर सहित कई भाजपा कार्यकर्ता मौजूद रहे।
















































