सुप्रीम कोर्ट के फैसले को दरकिनार कर अरावली में नए खनन पट्टे बांट रही है सरकार: गहलोत

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
“MPSM के बिना खनन पर रोक के बावजूद अरावली रेंज में 50 पट्टों की नीलामी, खनन विभाग के आदेशों ने खोली भाजपा सरकार की पोल”
जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री  अशोक गहलोत ने अरावली पर्वतमाला में सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों की अवहेलना का आरोप लगाते हुए भजनलाल सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि एक ओर केंद्र और राज्य सरकारें अरावली संरक्षण के बड़े-बड़े दावे कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट के 20 नवंबर 2025 के फैसले के बावजूद अरावली क्षेत्र में नए खनन पट्टे जारी किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री के बयानों में विरोधाभास
गहलोत ने कहा कि केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव यह दावा कर रहे हैं कि जब तक मैनेजमेंट प्लान फॉर सस्टेनेबल माइनिंग (MPSM) तैयार नहीं हो जाता, तब तक अरावली की 100 मीटर से ऊंची या नीची किसी भी पहाड़ी पर नया खनन पट्टा नहीं दिया जाएगा।
इसके बावजूद राजस्थान सरकार ने 14 नवंबर 2025 को आदेश क्रमांक
निदे/अ.ख.अ./नीलामी (ML-10)/2025/ई-13327
जारी कर 126 नए खनन पट्टों की प्रक्रिया शुरू की, जिनमें से 50 पट्टे अरावली रेंज के 9 जिलों— जयपुर, अलवर, झुंझुनूं, राजसमंद, उदयपुर, अजमेर, सीकर, पाली और ब्यावर—में स्थित हैं।
उन्होंने कहा कि 20 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बावजूद नीलामी नहीं रोकी गई, बल्कि 30 नवंबर 2025 को आदेश जारी कर यह प्रमाणित करने का प्रयास किया गया कि ये 50 पट्टे अरावली का हिस्सा नहीं हैं, जो पूरी तरह भ्रामक है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश की खुली अवहेलना
अशोक गहलोत ने सवाल उठाया कि जब सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि MPSM के बिना किसी भी नई खनन गतिविधि की अनुमति नहीं दी जा सकती, तो राजस्थान सरकार किस आधार पर इन पट्टों की नीलामी कर रही है?
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने हाईकोर्ट में यह तर्क देकर दिसंबर 2025 में नीलामी कर दी कि ये पहाड़ 100 मीटर से नीचे हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट का आदेश 100 मीटर से ऊपर और नीचे— दोनों पर लागू होता है।
उन्होंने इसे अरावली के अस्तित्व को समाप्त करने की साजिश करार दिया।
“यह भविष्य की खतरनाक मिसाल है”
गहलोत ने चेताया कि यह मामला इस बात का उदाहरण है कि आने वाले समय में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की आड़ लेकर तकनीकी बहाने बनाकर पूरे अरावली क्षेत्र में खनन खोला जा सकता है।
साधु-संत धरने पर, मुख्यमंत्री भाषणों में व्यस्त
पूर्व मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा अरावली बचाने के भाषण दे रहे हैं, जबकि उनके गृह जिले भरतपुर के पड़ोसी डीग में साधु-संत अवैध खनन के खिलाफ धरने पर बैठे हैं।
उन्होंने कहा कि “जब अपने क्षेत्र में अरावली सुरक्षित नहीं है, तो बाकी प्रदेश की क्या स्थिति होगी?”
जवाबदेही से बच रही है सरकार
अशोक गहलोत ने आरोप लगाया कि केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव न तो
केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) को कमजोर करने पर
✔ और न ही सरिस्का के प्रोटेक्टेड एरिया में तीन दिन में किए गए बदलावों पर कोई संतोषजनक जवाब दे पाए हैं।
उन्होंने कहा कि चूंकि मुख्यमंत्री स्वयं खनन मंत्री भी हैं, इसलिए उन्हें प्रदेश की जनता को यह स्पष्ट जवाब देना चाहिए कि—
“क्या वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले और अपने ही केंद्रीय मंत्री के बयानों के खिलाफ जाकर अरावली में बिना MPSM के नए खनन पट्टे जारी करेंगे?”
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