सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश ने सांगानेर इलाके की 86 कॉलोनियों के लाखों लोगों की उड़ाई नींद

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लोक टुडे न्युज़ नेटवर्क
हाउसिंग बोर्ड की अवाप्तशुदा जमीन का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट का आदेश बरकरार रखा, अब हाउसिंग बोर्ड कार्रवाई को स्वतंत्र –
मुख्यमंत्री का एक आदेश दे सकता है लाखों लोगों को राहत
डरने की नहीं लड़ने की जरूरत

 

 

नीरज मेहरा वरिष्ठ पत्रकार

 

लोक टुडे न्यूज नेटवर्क।
जयपुर। सांगानेर क्षेत्र में हाउसिंग बोर्ड की अवाप्तशुदा जमीन पर बसी 86 अवैध कॉलोनियों के नियमन पर अब रोक लग गई है। सुप्रीम कोर्ट ने हाउसिंग बोर्ड को सांगानेर इलाके में बसी 86 कॉलोनी पर अतिक्रमण हटाने  के लिए स्वतंत्र किया है। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से इस इलाके में रह रहे लाखों लोगों की नींद उड़ गई है और लोग परेशान है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार की दायर एसएलपी (विशेष अनुमति याचिका) को खारिज करते हुए हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा है
इसके साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह अवैध अतिक्रमण हटाकर भूमि को खाली कराए और जिन अफसरों ने अवैध निर्माणों को मंजूरी दी, उनके खिलाफ कार्रवाई करे।
इस आदेश के बाद अब हाउसिंग बोर्ड इन कॉलोनियों पर कार्रवाई करने और कब्जा लेने के लिए स्वतंत्र हो गया है।
सरकार करना चाहती थी नियमन
राज्य सरकार ने 12 मार्च 2025 को आदेश जारी कर इन कॉलोनियों को जेडीए को ट्रांसफर कर पट्टे देने की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की थी। यह शर्त रखी गई थी कि जिन अवाप्तशुदा जमीनों पर 80% से अधिक बसावट हो चुकी है, उन्हें नियमन के दायरे में लाया जाएगा।
इसी आदेश के खिलाफ पब्लिक अगेंस्ट करप्शन संस्था ने हाई कोर्ट में पीआईएल दायर की थी, जिसमें कहा गया था कि अफसरों ने भूमाफियाओं से मिलीभगत कर अवैध कब्जों को वैध ठहराने की कोशिश की।
हाउसिंग बोर्ड की रिपोर्ट
हाउसिंग बोर्ड ने सांगानेर क्षेत्र में 69 अवैध कॉलोनियों की सूची तैयार की है, जिनमें करीब 7,258 भूखंड हैं। इन कॉलोनियों में लगभग 70–80 प्रतिशत तक मकान बन चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बोर्ड अब इन जमीनों को खाली कराने की कार्रवाई शुरू कर सकता है।
प्रभावित क्षेत्र
बी-टू बाईपास से सांगानेर तक फैले इलाकों में
बी-टू बाईपास पूरनबाड़ी, विनोबा विहार, मॉडल टाउन सी, श्रीराम कॉलोनी, पारस नगर, श्री विहार, एसएमएस ग्रीन वैली बी ब्लॉक, मिथला नगर, आग्रवाल नगर, लक्ष्मी कॉलोनी, प्रताप वाटिका, प्रताप विहार, गायत्री कॉलोनी बी, नंद कॉलोनी, कुमुद विहार, गणेश विहार, फूल कॉलोनी, गोवर्धन नगर, कृषि नगर डी, गोर्वधन नगर पूर्व, कृषि नगर, गुलाब नगर विस्तार, गणेश नगर विस्तार, मोती विहार, नारायण कॉलोनी, अनिता कॉलोनी ए. गायत्री नगर द्वितीय, अनिता कॉलोनी बी व सी, कृष्णा विहार, महावीर नगर बी, कैलाशपुरी, विराट नगर, महाबीर कॉलोनी, महावीर सागर, शिव बिहार, आजाद कॉलोनी, गणेश नगर, रामनगर, सावित्री नगर, गायत्री नगर, गुलाब कॉलोनी, चंदन विहार, राधा गोविंद नगर, मारुति कॉलोनी, प्रताप वाटिका, जगनाथ पुरी, मौजी कॉलोनी, आजाद नगर, नंद विहार, प्रतापनगर डी, रघुनाथ विहार द्वितीय विहार, प्रोफेसर कॉलोनी, शिव नगर, मनीषा विहार, आनंद विहार रामेश्वरम, प्रतापपुरी, कालिंदी विहार, जगनाथ नगर, मारुति नगर, दीप विहार, गोपाल विहार, रघुनाथपुरी द्वितीय पार्शवनाथ जैसी करीब 86 कॉलोनियां शामिल हैं
कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से करीब 10 हजार भूखंडधारी प्रभावित होंगे।
अब हाउसिंग बोर्ड इन अवैध कॉलोनियों पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है।
सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए हाउसिंग बोर्ड को कार्रवाई के लिए स्वतंत्र किया है  । अब यह हाउसिंग बोर्ड पर निर्भर करता है कि वह इन कॉलोनियों का नियमन करता है या फिर इनको बेदखल करता है और यह सब कुछ निर्भर करता है राजस्थान सरकार पर।  क्योंकि राजस्थान हाउसिंग बोर्ड भी राजस्थान सरकार के अधीन आता है क्योंकि अब संभव नहीं है कि 86 कॉलोनियों में पिछले 30 -35 सालों से बसे लाखों लोगों को खाली कराकर बेघर किया जाए और फिर वहां पर नई कॉलोनी विकसित की जाए।  सरकार ने हाउसिंग बोर्ड का गठन भी इसलिए किया है कि वह लोगों के लिए रहने के लिए घर बनाएं या उन्हें भूखंड आवंटित करें । लेकिन जब हाउसिंग बोर्ड अपने इस कर्तव्य में विफल होता है तो  सोसाइटियों के मार्फत गरीब लोग सस्ते के चक्कर में सोसाइटी में प्लॉट खरीदने हैं और वहां बसावट हो जाती है। यह 86 कॉलोनी का मामला भी ऐसा ही है जिनमें लोगों ने सस्ती दरों पर प्लाट खरीदे ,सालों से रह रहे हैं , कईयों की शादी, ब्याह हो गई, कईयों का जन्म हो गया और वह लंबे समय से यहां पर निवास करते हैं। यह उनके सपनों का घर है अगर अब इन सपनों के घरों पर बुलडोजर चलता है तो लाखों लोग सड़क पर आ जाएंगे ।
सरकार कभी नहीं चाएगी कि इतने लोग एक साथ सरकार के खिलाफ सड़क पर आए या बेघर हो । ऐसी स्थिति में हाउसिंग बोर्ड के जिन अधिकारियों के कार्यकाल के दौरान यह कालोनियां बसी है उनमें से बहुत सारे तो रिटायर हो गए होंगे, या तो सरकार  उन तमाम लोगों से रिकवरी करें या सीधा सा की सरकार इन सभी कॉलोनीयों का हाउसिंग बोर्ड से ही नियमन करवाए। जिससे राजस्थान सरकार को हाउसिंग बोर्ड से राजस्व में मिलेगा । सुप्रीम कोर्ट ने  यह नहीं कहा कि इनको तोड़ना जरूरी है ,सुप्रीम कोर्ट ने यह काम हाउसिंग बोर्ड के ऊपर छोड़ दिया है कि वह स्वतंत्र है वह चाहे तो उसे तोड़े , रखे क्या करना है, वह कार्यवाही के लिए स्वतंत्र है। जाहिर सी बात है कि इस मामले में अब निर्णय राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को करना होगा, जो इन लोगों की समस्या को देखते हुए जनहित में ही फैसला करेंगे।  क्योंकि राजस्थान सरकार ने पहले ही इस मामले को जेडीए से नियमन के आदेश दे रखे हैं। ऐसे में जेडीए की बजाय इसको राजस्थान हाउसिंग बोर्ड के मार्फत भी नियमित किया जा सकता है।
राज्य सरकार के नए आदेश तक लोगों वैसे तो डर का माहौल है कई लोगों ने मकान बेचना भी शुरू कर दिए
जब से प्रदेश के बड़े समाचार पत्रों में यह समाचार प्रकाशित हुआ है और सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए राजस्थान हाउसिंग बोर्ड को यहां पर कार्यवाही करने के लिए स्वतंत्र  के आदेश दिए हैं ,तब से इन कॉलोनियों में रहने वाले अधिकांश लोगों की नींद उड़ गई है । लोग परेशान है, पशोपेश में है कि वह क्या करें, क्योंकि व्यक्ति के लिए घर बनाना सबसे मुश्किल काम होता है।  जीवन में एक ही बार घर बन सकता है और जैसा की जिन लोगों ने भी घर बना रखे हैं । उन्होंने अपने खून पसीने की कमाई से यहां पर घर बनाए होंगे। आशियाने बनाए होंगे, बड़ी उम्मीद के साथ घर बनाए हैं ,जो लोग जेड़ीए और हाउसिंग बोर्ड से प्लॉट, भूखंड खरीदने में असमर्थ होते हैं या  असक्षम होते हैं वही लोग सोसाइटियों के मार्फत अपने लिए घर खरीदते  हैं । जब इस तरह का मामला सामने आए तो फिर लोगों में डर होना लाजमी है । स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मामले में सरकार को आगे आकर कोई आश्वासन देना चाहिए, जिससे लोगों का डर खत्म हो । कई लोग अपने घरों की बिकवाली भी निकाल चुके हैं। इन कॉलोनी में अचानक से रेटों में 20-30 तक की गिरावट आ चुकी है ।  भू माफिया इन कॉलोनियों में सक्रिय है वह इस डर को और बडा  रहे हैं। ऐसे में राजस्थान  के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को चाहिए कि वह इस मामले में जल्द ही हाई लेवल की मीटिंग बुलाए और  हाउसिंग बोर्ड को निर्देशित करें कि आगे का एक्शन प्लान क्या होगा । मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जैसे ही हाउसिंग बोर्ड को इन कॉलोनीयों के नियमन के आदेश देंगे उसके साथ ही मामला शांत हो जाएगा। राजस्थान में हाउसिंग बोर्ड का गठन भी इसीलिए किया गया था कि वह जमीने अधिग्रहित करें और वहां पर व्यवस्थित रूप से आवासीय कालोनियां बसाए। सांगानेर के आसपास की जिन 86 कॉलोनीयों की जमीन अधिग्रहित किए जाने की बात चल रही है वहां भी हाउसिंग बोर्ड का यही मकसद था लेकिन तत्कालीन अधिकारी जो भ्रष्टाचार में लिप्त रहे ,उन लोगों ने मिली भगत करके सोसाइटियों के मार्फत यहां पर पहले कालोनियां काटने दी ,फिर बसावट होने दी। अब 40 साल बाद में यदि सरकार यहां पर कार्यवाही करती है तो यह सरासर अन्याय होगा ।
सरकार को चाहिए कि वह उस समय के तत्कालीन अधिकारियों खिलाफ कार्रवाई करें ।  जो वर्तमान में अपना घर बना कर रह रहे हैं उन कॉलोनीयों को नियमित करें ,जिससे इन लोगों का डर खत्म हो।  यही एक लोकतांत्रिक सरकार का कर्तव्य है । मुख्यमंत्री के इसी एक आदेश से यहां के लोगों को राहत मिलेगी और लोगों सरकार की जय जयकार भी करेंगे।
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