लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
उनियारा (टोंक)। श्री दिगंबर जैन सुखोदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र, सुथड़ा में जैन धर्म के 20वें तीर्थंकर भगवान मुनिसुव्रतनाथ का गर्भ कल्याणक महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर दिनभर चले धार्मिक आयोजनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
महोत्सव के दौरान भगवान मुनिसुव्रतनाथ की पूजा-अर्चना, अभिषेक, शांतिधारा और भक्तामर दीपार्चना सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
प्रबंध समिति के बाबूलाल कासलीवाल और सन्तु जैन ने बताया कि जैन परंपरा के अनुसार श्रावण कृष्ण द्वितीया के दिन भगवान मुनिसुव्रतनाथ स्वर्ग से अवतरित होकर माता रानी सोमा देवी के गर्भ में पधारे थे। इसी पावन स्मृति में प्रत्येक वर्ष गर्भ कल्याणक महोत्सव श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है।
भगवान मुनिसुव्रतनाथ जैन धर्म के 20वें तीर्थंकर हैं। उनका जन्म मगध देश की राजगृही नगरी में राजा सुमित्र और रानी सोमा देवी के यहां हुआ था। उनका लांछन कछुआ (कूर्म) है। उन्होंने अपने जीवन के माध्यम से अहिंसा, संयम, आत्मानुशासन और तपस्या का संदेश दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ शास्त्री हिमांशु जैन के निर्देशन में मंगलाष्टक के साथ हुआ। इसके बाद भगवान का नित्याभिषेक एवं शांतिधारा संपन्न हुई।
वार्षिक शांतिधारा का पुण्य लाभ मंजू देवी, रमेशचंद, शिवानी एवं रौनक सर्राफ (जयपुर) तथा तीर्थ रक्षक शम्भूदयाल हरकचंद जैन, सुथड़ा को प्राप्त हुआ। वहीं पाण्डुकशिला की मासिक शांतिधारा का सौभाग्य प्रेम देवी धर्मपत्नी ज्ञानचंद जैन, इंद्रगढ़ को मिला।
प्रथम शांतिधारा का पुण्यार्जन बाबूलाल कासलीवाल, मनीष कुमार एवं कमल कुमार कासलीवाल, उनियारा ने किया, जबकि द्वितीय शांतिधारा मुकेश कुमार, हेमंत कुमार एवं लक्ष्मीकांत बरवाड़ा परिवार के सौजन्य से संपन्न हुई।
सायंकाल 7 बजे भगवान मुनिसुव्रतनाथ की भव्य भक्तामर दीपार्चना का आयोजन किया गया। भक्तामर संयोजक मनोज जैन एवं बसंत जैन बनेठा ने बताया कि शुक्रवार भक्तामर मंडल, उनियारा के सदस्यों ने सामूहिक रूप से दीप प्रज्वलित कर भगवान की आराधना की।
दीपों की दिव्य आभा और भक्तिमय वातावरण में आयोजित इस धार्मिक आयोजन में श्रद्धालुओं ने भगवान मुनिसुव्रतनाथ की आराधना कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
