लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
उनियारा, टोंक | (दुर्योधन मयंक) राजस्थान के टोंक जिले के सूथड़ा ग्राम में स्थित श्री मुनिसुव्रतनाथ दिगम्बर जैन सुखोदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र आस्था, इतिहास और चमत्कारिक परंपराओं का अनूठा संगम है। यह तीर्थस्थल न केवल जैन धर्मावलंबियों के लिए, बल्कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
तेरहवीं शताब्दी के अद्भुत ‘सुखोदय मानस्तम्भ’
इस तीर्थ की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थित तीन विशाल पाषाण निर्मित सुखोदय मानस्तम्भ हैं, जिन्हें तेरहवीं शताब्दी का माना जाता है।
मान्यता है कि ये स्तम्भ हर वर्ष एक यव (जौ के दाने) के बराबर भूमि में समा जाते हैं।
जनश्रुति के अनुसार, प्राचीन काल में इन स्तंभों की परीक्षा के दौरान उनसे विभिन्न रंगों का द्रव्य निकलने लगा, जिसके बाद इन्हें चमत्कारिक मानते हुए विशेष संरक्षण दिया गया।

शनिग्रह निवारक के रूप में प्रसिद्ध
यह तीर्थ शनिग्रह के कष्टों से मुक्ति दिलाने वाला स्थान माना जाता है।
श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य फल देती है।
रोजाना आसपास के क्षेत्रों जैसे उनियारा, बनेठा, अलीगढ़, ककोड़ और ढिकोलिया से भक्त अभिषेक और पूजन के लिए पहुंचते हैं।
सायंकाल आरती और भक्तामर दीपार्चना से पूरा परिसर भक्तिमय हो उठता है।
धार्मिक अनुष्ठानों का संचालन
इस पवित्र स्थल पर सभी धार्मिक कार्यक्रमों का संचालन प्रिंस देवांश जैन द्वारा श्रद्धापूर्वक किया जाता है, जो इसे आध्यात्मिक ऊर्जा से जीवंत बनाए रखते हैं।

ऐतिहासिक मान्यता और पुनर्जीवन
10 फरवरी 2010 को मुनि सुधासागर जी महाराज ने भगवान मुनिसुव्रतनाथ के मोक्ष कल्याणक दिवस पर इस स्थल को औपचारिक रूप से अतिशय तीर्थ घोषित किया।
इसके साथ ही:
- जीर्णोद्धार कार्य शुरू हुआ
- नए जिनालय निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ
वार्षिक मेला और धार्मिक आयोजन
हर वर्ष फाल्गुन बदी 12 को यहां भव्य मेला आयोजित होता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं।
यह आयोजन:
- धार्मिक आस्था का केंद्र
- सामाजिक और सांस्कृतिक समागम
- जैन समाज की एकता का प्रतीक
सूथड़ा का यह सुखोदय अतिशय तीर्थ केवल एक ऐतिहासिक धरोहर नहीं, बल्कि जीवंत आस्था का प्रतीक है। यहां होने वाले नियमित अभिषेक, आरती और धार्मिक अनुष्ठान इसे आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बनाते हैं।



















































