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सिरोही में 15 साल बाद लौटे नगीना साहनी, परिवार कर चुका था अंतिम संस्कार

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लोक टुडे न्यूज नेटवर्क

‘मानव सेवा आश्रम’ ने बदल दी एक परिवार की ज़िंदगी, सेवा का अनोखा उदाहरण बना

सिरोही। कभी-कभी जीवन ऐसी कहानियाँ गढ़ता है जो किसी फिल्मी पटकथा से भी अधिक चौंकाने वाली होती हैं। बिहार के 62 वर्षीय नगीना साहनी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। 15 साल पहले गंगा स्नान के दौरान परिवार से बिछड़ गए नगीना साहनी को वर्षों तक खोजा गया, पर कोई सुराग न मिलने पर परिवार ने उन्हें मृत मान लिया। अंतिम संस्कार कर दिया गया, पत्नी ने मंगलसूत्र उतार दिया, बच्चे पिता के लौटने की आस छोड़ बैठे और रिश्तेदारों ने भी मान लिया कि वे अब कभी वापस नहीं आएंगे। लेकिन नियति ने ऐसा खेल खेला कि आज 15 वर्षों बाद नगीना साहनी जीवित अपने घर लौटे हैं।

मानव सेवा का अद्वितीय उदाहरण

इस असंभव प्रतीत होने वाले मिलन को संभव बनाया सिरोही जिले के जिगर रावल ने। उन्होंने ‘मानव सेवा आश्रम, स्वरूपगंज’ की स्थापना कर समाज में बिछड़े और बेसहारा लोगों को परिवार से मिलाने का अभियान चलाया है। महज पाँच महीनों में उन्होंने 10 से अधिक लोगों को उनके घर लौटाया है। नगीना साहनी की वापसी इस पहल की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

कैसे बिछड़े थे नगीना साहनी?

वर्षों पहले नगीना साहनी अपने परिवार के साथ कोलकाता के बाबू घाट पर गंगा स्नान करने गए थे। भीड़ में बिछड़ने के बाद वे घर का रास्ता खो बैठे। परिजनों ने हर संभव प्रयास कर उन्हें खोजा, लेकिन जब कोई खबर नहीं मिली तो अंततः धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। परिवार ने उन्हें खो दिया मान लिया।

वापसी का भावुक क्षण

आज जब नगीना साहनी अपने घर लौटे तो पूरा गाँव भावुक होकर उन्हें देखने उमड़ पड़ा। बच्चों की आँखों से आंसू बहते रहे और पत्नी वर्षों बाद फिर से मंगलसूत्र पहनने को आतुर दिखीं। यह क्षण परिवार के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था। गाँव वालों ने इसे पुनर्जन्म जैसा बताया।

जिगर रावल का प्रेरक संदेश

इस सेवा कार्य के पीछे की भावना पर जिगर रावल ने कहा,
“आओ, किसी और के लिए जीते हैं। यही मानव जीवन का असली उद्देश्य है। यदि समाज मिलकर काम करे तो कोई भी इंसान बेसहारा नहीं रहेगा। उम्मीद कभी मत छोड़िए और सेवा का भाव ही जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।”

देश के लिए प्रेरणा

यह कहानी सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज और देश के लिए एक प्रेरणा है। संकट में घिरे, बिछड़े या निराश लोगों के लिए यह आशा का दीपक है। मानव सेवा आश्रम जैसे प्रयास समाज में संवेदनशीलता, सहयोग और मानवता की भावना को सशक्त कर रहे हैं।

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