लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप, प्रशासन ने किया खंडन
सवाई माधोपुर/खण्डार।
राजस्थान में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR-2025) प्रक्रिया के दौरान एक और गंभीर मामला सामने आया है। खण्डार क्षेत्र के बहरावंडा खुर्द के सेवती खुर्द में तैनात बीएलओ और शिक्षक हरिओम बैरवा (उम्र लगभग 35 वर्ष) की बुधवार सुबह ड्यूटी के दौरान अचानक मौत हो गई। परिजनों ने प्रशासनिक दबाव को मौत की बड़ी वजह बताया है, जबकि अधिकारियों ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है।
सुबह तहसीलदार का फोन, 10 मिनट बाद मौत
परिजनों के अनुसार बुधवार सुबह 7:32 बजे खण्डार तहसीलदार का फोन आया। 29 सेकंड की बातचीत के करीब 10 मिनट बाद हरिओम को अचानक अटैक आया और वे गिर पड़े। परिजन उन्हें अस्पताल ले जाते इससे पहले ही उनकी मौत हो गई।
परिजनों का आरोप: 6 दिनों से भारी दबाव में थे हरिओम
परिजनों—आशीष बैरवा, हितेश बैरवा, पिता बृजमोहन बैरवा, माता छोटा देवी तथा पत्नी मनीषा बैरवा—का कहना है कि पिछले 6 दिनों से तहसीलदार जयप्रकाश रोनल रोजाना फोन कर हरिओम पर अतिरिक्त दबाव डाल रहे थे।
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हरिओम रोज सुबह 7–8 बजे से निकलकर देर रात 9–10 बजे घर लौटते थे।
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घर लौटने के बाद भी रात 1–2 बजे तक SIR का काम करना पड़ता था।
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उन्हें न खाने-पीने का समय मिलता था, न नींद।
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लगातार तनाव के कारण मानसिक दबाव बढ़ता गया।
दो दिन पहले हरिओम ने ई-मित्र संचालक के सामने भी अपनी पीड़ा व्यक्त की थी।
चार बेटियों के सिर से उठा पिता का साया
हरिओम बैरवा छह वर्ष पहले सरकारी सेवा में आए थे। उनकी चार बेटियाँ हैं—
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अक्षिता (8 वर्ष) – कक्षा 5
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अंजली (5 वर्ष) – कक्षा 1
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अर्पिता (3 वर्ष) – यूकेजी
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अनन्या (1 वर्ष)
मृतक के पिता मजदूरी करते हैं। हरिओम की अचानक मौत से परिवार आर्थिक और मानसिक संकट में डूब गया है।
परिजनों ने कॉल हिस्ट्री दिखाकर दबाव के प्रमाण बताए
परिजनों ने तहसीलदार द्वारा अलग-अलग दिनों में किए गए फोन कॉल्स की हिस्ट्री भी साझा की:
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11 नवंबर: 5:26 बजे (10 सेकंड), 8:19 बजे (1 मिनट 45 सेकंड)
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14 नवंबर: 8:10 बजे (52 सेकंड)
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17 नवंबर: 11:50 बजे
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18 नवंबर: 10:01 बजे (1 मिनट 55 सेकंड)
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19 नवंबर: 7:32 बजे — मौत से ठीक 10 मिनट पूर्व

अधिकारियों का खंडन: “आरोप पूरी तरह निराधार”
तहसीलदार जयप्रकाश रोनल ने कहा—
“हरिओम अच्छा सहयोगकर्ता था। उसका काम पूरा था। उसकी मौत दुखद है, पर किसी भी तरह का दबाव नहीं बनाया गया। आरोप निराधार हैं।”
एसडीएम वर्षा मीना ने कहा—
“हरिओम का कार्य सही था। उनकी मौत आकस्मिक अटैक से हुई होगी। जब कार्य में कोई कमी नहीं थी, तो दबाव कैसे?”
पुलिस ने कहा—रिपोर्ट का इंतजार
बहरावंडा खुर्द चौकी प्रभारी ने बताया कि परिजन आवेदन लेकर आए थे, जिसे खण्डार थाने भेज दिया गया।
खंडार थानाधिकारी लक्ष्मण सिंह ने बताया कि अभी तक परिजनों ने FIR दर्ज नहीं करवाई है। रिपोर्ट मिलते ही आगे कार्रवाई की जाएगी।

स्थानीय स्तर पर बढ़ी चर्चा, जांच से ही साफ होगी सच्चाई
मामला अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। परिजन प्रशासनिक दबाव को मौत की वजह बताते हुए न्याय की मांग कर रहे हैं, जबकि अधिकारी इसे आकस्मिक घटना बता रहे हैं।
अभी जांच लंबित है, और वास्तविक स्थिति रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।















































