लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
“मेरी गाड़ी मेरा बंगला, सब तेरा सांवरिया सेठ… मैं तो कुछ भी नहीं”: दूधिया रोशनी में नहाया पादूकलां
पादूकलां (नागौर)। फाल्गुनी लक्की मेले के अवसर पर पादूकलां स्थित श्री श्याम दरबार मंदिर में आस्था का विराट सागर उमड़ पड़ा। रात्रि में आयोजित भव्य भक्ति संध्या ने पूरे क्षेत्र को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। दीपों की जगमगाहट और दूधिया रोशनी से नहाया मंदिर परिसर मानो दिव्यता का प्रतीक बन गया। “जय श्री श्याम” के गगनभेदी जयकारों से वातावरण पूरी तरह श्याममय हो उठा।
दिनभर एकादशी के विशेष श्रृंगार के दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी रहीं। अनुमानतः 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा के दरबार में मत्था टेककर पुण्य लाभ अर्जित किया। बाहर से आए भक्तों के लिए पेयजल, अल्पाहार व अन्य व्यवस्थाएं की गईं।
रात्रि में भजन संध्या का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में लक्ष्मण राम कलरु ने शिरकत की। मेला कमेटी द्वारा दुपट्टा व श्याम बाबा का छायाचित्र भेंटकर उनका स्वागत-सम्मान किया गया।
इस अवसर पर मेवड़ा धाम अच्छीनाथजी मंदिर के महंत पीर योगी लक्ष्मणनाथजी महाराज, रानाबाई मंदिर महंत पांचाराम जी महाराज, रियांबड़ी एसडीएम सूर्यकांत शर्मा, नगर पालिका ईओ धर्मेन्द्र कुमार, नागौर किसान मोर्चा जिला अध्यक्ष मदन राम गौरा, एडवोकेट रामकिशोर तिवाड़ी, कमेटी अध्यक्ष श्याम सुंदर दाधीच सहित अनेक जनप्रतिनिधि व गणमान्यजन उपस्थित रहे।
भजन संध्या में झूम उठा पंडाल
भक्ति संध्या का मुख्य आकर्षण चित्तौड़गढ़ से पधारे सुप्रसिद्ध भजन गायक गोकुल शर्मा रहे। उन्होंने “मेरी गाड़ी मेरा बंगला”, “हल्का में ना लेवूं मारा सांवरिया की माया ने”, “सांवरिया घर में लगाई तस्वीर कसम से चमक गई तकदीर”, “गाड़िया-गाड़िया होटल पे नाम लिखियो सांवरिया को”, “लाल लाल चुनरी में मोती चमके जोगणिया रानी महिमा अपरंपार”, “मेरा सोना मेरी चांदी, मैं खाली हाथ आया सरकार आपके दरबार”, “हर बुधवार को मनावा आओ प्यार गजानंद” जैसे भजनों की सुमधुर प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को देर रात तक झूमने पर मजबूर कर दिया।
साथ ही गजानंद, तेजा महाराज व अन्य देवी-देवताओं की महिमा का भी गुणगान किया गया। उनकी भावपूर्ण प्रस्तुतियों पर पूरा पंडाल भक्ति की लय में थिरकता नजर आया।
दूधिया रोशनी से आलोकित श्याम मंदिर परिसर में आस्था, संगीत और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। लक्की मेले का यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, लोकसंस्कृति और अटूट श्रद्धा का जीवंत उत्सव बन गया। पादूकलां की धरती एक बार फिर श्याम भक्ति के विराट महाकुंभ की साक्षी बनी।


















































