श्रीविधाणी परिक्रमा महोत्सव में पहले दिन उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

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लोक कलाकारों ने गुरु महिमा का गान कर बांधा समां

रामधुन से गूंजा आश्रम, श्रद्धालु हुए भावविभोर

निशुल्क चिकित्सा शिविर में ग्रामीणों को मिली राहत

लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
जयपुर। निकटवर्ती गोनेर रोड​ विधाणी स्थित श्रीगोपाल सागर आश्रम में गुरुवार को लोक कलाकारों ने अनूठे भजन पेश कर समां बांध दिया। श्रीविधाणी परिक्रमा महोत्सव के तहत आकाशवाणी के कलाकार अशोक शर्मा और शंकर शर्मा ने गुरु महिमा के भजन पेश किए। भजनों से भाव विभोर अनेक श्रद्धालु नृत्य कर भगवान को रिझाते रहे। महोत्सव के लिए आश्रम को रंग बिरंगी रोशनी से सजा दिया गया है। वहीं, झांकियों की सजावट का काम जोरों पर है।​
इस मौके पर लोक कलाकार कैलाश शर्मा छंदेल ने सत सतगुरु म्हारे एक बार पावना पधारो सा…. और सतगुरु तेरे चरणों की यदि धूल जो मिल जाए …. सरीखे गुरु महिमा के भजन पेश कर श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया। श्रद्धालु देर तक भजनों पर नृत्य कर भगवान को रिझाते रहे।
आश्रम के लक्ष्मी नि​धि सरजू बिहारी ने बताया कि  ​मि​थिला बिहारी जी महाराज के नेतृत्व में 18 से 23 सितंबर तक श्री विधाणी परिक्रमा महोत्सव मनाया जा रहा है। इसके तहत आश्रम परिसर में अनेक कार्यक्रम शुरू हुए। शाम को भजन संध्या में कलाकारों ने भजन पेश किए। महोत्सव के तहत वि​भिन्न मठ-मंदिरों तथा धाम से पधारे संत-महात्माओं ने आ​शिर्वचन किया। भजन संध्या में आसपास ग्रामीण क्षेत्र सहित जयपुर व अन्य शहरों के श्रद्धालु शामिल हुए। इस मौके पर मिथिला बिहारी जी महाराज के सानिध्य में आमेर विधायक प्रशांत शर्मा ने निशुल्क चिकित्सा शिविर का उद्घाटन किया। शिविर में एलोपैथी, होम्योपैथी और आयुष पद्धति से परामर्श कर विशेषज्ञ चिकित्सकों ने निशुल्क दवाएं वितरित की।
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*खस और चंदन से महका आश्रम परिसर*
महोत्सव के लिए आश्रम परिसर में भव्य सजावट शुरू हो गई है। आश्रम में हर दिन सजीव पुष्पों से सजावट की जा रही है। पूरा परिसर खस और चंदन की महक से सुवासित हो रहा है। भगवान गोपालेश्वर महादेव की भव्य झांकी श्रद्धालुओं का मन मोह रही ​थी। गोपाल सागर के चरणामृत का वितरण किया गया।

24 घंटे राम धुन से गूंजेगा आश्रम परिसर
श्री विधानी आश्रम में महत्व के तहत गुरुवार दोपहर 12:15 बजे रामधुनी का शुभारंभ हुआ। इस मौके पर जगदीश भगवान हनुमान जी और श्री राम दरबार की आरती की गई इसके बाद लोक कलाकारों ने हारमोनियम, झांझ मंजीरे और तबला से रामधुनी शुरू की।

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