लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
महंत बालकनाथ महाराज के मुख्य आतिथ्य में हुआ समारोह, हजारों लोगों की मौजूदगी में लोकदेवता की वीरगाथा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का संकल्प
नायल देवड़वाल भोमिया बाबा की वीरगाथा अब पुस्तक में संकलित, भावी पीढ़ियों तक पहुंचेगा इतिहास और परंपराओं का गौरव
जमवारामगढ़ (जयपुर)। लोकदेवताओं का इतिहास किसी समाज की आस्था, शौर्य और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। इसी विरासत को सहेजने की दिशा में श्री नायल भोमिया बाबा मंदिर परिसर, क्यारा झोल, मानोता में महाराजा श्री नायल देवड़वाल भोमिया बाबा के इतिहास पर आधारित पुस्तक का भव्य विमोचन किया गया। विशाल मेले के दौरान आयोजित समारोह में हजारों लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम में महंत श्री श्री 108 बालकनाथ महाराज मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि अध्यक्षता श्री नायल भोमिया बाबा विकास सेवा समिति के अध्यक्ष जगदीश मीना ने की।
समारोह में संयुक्त निदेशक अभियोजन मंगलचंद मीना, चमन राम मीना और पुस्तक के लेखक ताराचंद मीना (चीता) विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। आयोजन का केंद्र लोकदेवता से जुड़ी ऐतिहासिक मान्यताओं, वीरगाथाओं, धार्मिक आस्था और सामाजिक-सांस्कृतिक परंपराओं को दस्तावेज के रूप में संरक्षित करने का प्रयास रहा।
वीरता, वंश परंपरा और लोक आस्था का संकलन
लेखक ताराचंद मीना (चीता) ने महाराजा श्री नायल देवड़वाल भोमिया बाबा के इतिहास से जुड़े विभिन्न प्रसंगों को संकलित कर पुस्तक तैयार की है। इसमें उनके जीवन, वीरता, पराक्रम, वंश परंपरा, धार्मिक मान्यताओं और सांस्कृतिक विरासत से संबंधित सामग्री शामिल की गई है। पुस्तक में देवड़वाल गोत्र की वंशावली, पूर्वजों की वीरगाथाएं, तत्कालीन शासकों और ऐतिहासिक घटनाओं के संदर्भ, सामाजिक परंपराएं तथा धार्मिक आस्था से जुड़ी जानकारियां भी संकलित हैं। इसके साथ लोकदेवता की चालीसा, आरती और देवड़वाल परिवार के वंश-वृक्ष से संबंधित सामग्री को भी स्थान दिया गया है।
इस कृति का उद्देश्य लोक परंपराओं में संरक्षित इतिहास को व्यवस्थित रूप से सामने लाना और नई पीढ़ी को अपने पूर्वजों के योगदान तथा सांस्कृतिक मूल्यों से परिचित कराना है।
‘इतिहास और वीरता की विरासत को सहेजना जरूरी’
ट्रस्ट के संरक्षक डॉ. हर सहाय मीना, आईएएस अधिकारी, ने पुस्तक को इतिहास, वीरता और लोक आस्था का दस्तावेज बताया। उन्होंने कहा कि इसमें संकलित वंशावली, ऐतिहासिक प्रसंग और धार्मिक सामग्री समाज की परंपराओं को समझने में सहायक होगी। उन्होंने ऐसी कृतियों को सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास बताया।
पुस्तक का प्रकाशन श्री लक्ष्मी नारायण मीणा मेमोरियल ट्रस्ट, कानडिया वाला के सौजन्य से किया गया। ट्रस्ट की अध्यक्ष सुमन मीणा पंचायत समिति सदस्य एवं मानोता की पूर्व सरपंच हैं।
इतिहास का संरक्षण समाज की सामूहिक जिम्मेदारी
संयुक्त निदेशक अभियोजन मंगलचंद मीना ने कहा कि लोकदेवताओं और महापुरुषों से जुड़ी ऐतिहासिक सामग्री का संकलन और संरक्षण आवश्यक है। समाज की पहचान उसकी परंपराओं, आदर्शों और पूर्वजों के योगदान से बनती है। पुस्तकों के माध्यम से नई पीढ़ी को अपने इतिहास, त्याग और वीरता की गाथाओं से परिचित होने का अवसर मिलता है।
श्री नायल भोमिया बाबा विकास सेवा समिति के अध्यक्ष जगदीश मीना ने लेखक ताराचंद मीना (चीता) के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि ऐतिहासिक और पारंपरिक सामग्री का संकलन सांस्कृतिक धरोहर को अगली पीढ़ियों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। पुस्तक के प्रकाशन से महाराजा श्री नायल देवड़वाल भोमिया बाबा से जुड़ी मान्यताओं, लोकश्रुतियों और धार्मिक परंपराओं के अध्ययन को प्रोत्साहन मिलेगा।
जमनलाल मीना, प्रदेश प्रमुख बूंदा आदिवासी मीना समाज संस्था, मत्स्य क्षेत्र ने भी इतिहास और पूर्वजों की गौरवगाथाओं को सुरक्षित रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव बनाए रखना और विरासत को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाना समाज की साझा जिम्मेदारी है।
श्रद्धा और सामाजिक एकजुटता का संदेश
समारोह में श्री नायल भोमिया बाबा विकास सेवा समिति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रामदयाल मीना, महामंत्री रामकुवार मानोता, घनश्याम भावपुरा सहित समिति के सदस्य और अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
विशाल मेले के बीच आयोजित पुस्तक विमोचन समारोह ने लोकदेवता के प्रति श्रद्धा के साथ इतिहास, परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करने का संदेश दिया। यह आयोजन इस विचार को भी रेखांकित करता है कि लोक इतिहास को लिखित रूप देना केवल अतीत का संकलन नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी विरासत से जोड़ने का माध्यम है।
