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श्रृंगार पर्व में सजी संस्कृति की छटा, महिला सुरक्षा और साइबर जागरूकता का भी दिया संदेश

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

 कई जिलों की महिलाओं ने लिया 

कुचामन सिटी का यह आयोजन अनूठे  पहचान रखता है

रिपोर्टर –विमल पारीक

कुचामनसिटी। गणगौर महोत्सव के मौके पर डीडवाना–कुचामन जिले के कुचामन सिटी में बुधवार रात को आयोजित श्रृंगार पर्व कार्यक्रम इस बार खास मायनों में यादगार बन गया। जहां एक ओर इस आयोजन ने पारंपरिक संस्कृति और रीति-रिवाजों को जीवंत किया, वहीं दूसरी ओर यह मंच महिला सुरक्षा और साइबर जागरूकता जैसे महत्वपूर्ण विषयों को लेकर भी सजग नजर आया।

प्रदेशभर में गणगौर महोत्सव की धूम के बीच कुचामन सिटी का यह आयोजन अपने अनूठे स्वरूप और उद्देश्य के कारण अलग पहचान रखता है।

भारतीय संगीत सदन मीडिया प्रभारी ओमप्रकाश कुमावत ने बताया कि भारतीय संगीत सदन संस्थान द्वारा पिछले कई दशकों से आयोजित किए जा रहे इस कार्यक्रम की खासियत यह है कि यह विशेष रूप से महिलाओं के लिए समर्पित होता है और नई पीढ़ी को परंपराओं से जोड़ने का काम करता है। इस प्रोग्राम में कुचामनसिटी सहित आस पास के कई जिलों की महिलाओं ने भी प्रतियोगिता में भाग लिया व आयोजित कार्यक्रम में सैकड़ों महिलाएं मौजूद रही।
कार्यक्रम के दौरान तीन प्रमुख प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं—
पहली गवरी प्रतियोगिता, जिसमें अविवाहित युवतियां सोलह श्रृंगार कर भाग लेती हैं और उनमें से सर्वश्रेष्ठ को “गवरी” का खिताब दिया जाता है।
दूसरी गणगौर प्रतियोगिता, जिसमें विवाहित महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में भाग लेकर अपनी प्रस्तुति देती हैं और विजेता को “गणगौर” घोषित किया जाता है।
तीसरी और सबसे आकर्षक ईसर–गणगौर प्रतियोगिता होती है, जिसमें दंपति पारंपरिक परिधानों में भाग लेते हैं और सर्वश्रेष्ठ जोड़ी को विजेता चुना जाता है।

तीनों प्रतियोगिताओं के विजेताओं को संस्थान द्वारा सम्मानित भी किया गया। आयोजन समिति का मानना है कि ऐसे कार्यक्रम हमारी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

इस बार के आयोजन में एक खास पहल के तहत राजस्थान पुलिस की ओर से महिला सुरक्षा और साइबर अपराधों को लेकर जागरूकता सत्र भी आयोजित किया गया।
प्रशिक्षु आरपीएस रितु कुमारी ने कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज के डिजिटल दौर में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं, ऐसे में सतर्क रहना बेहद जरूरी है। उन्होंने महिलाओं को ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल और सोशल मीडिया के दुरुपयोग से बचने के उपाय बताए। साथ ही महिला सुरक्षा से जुड़े कानूनों और हेल्पलाइन की जानकारी भी साझा की।
उन्होंने श्रृंगार पर्व की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन में जहां हमारी समृद्ध संस्कृति की झलक मिलती है, वहीं समाज को जागरूक करने का भी सशक्त माध्यम बनते हैं।

आयोजन समिति सदस्य ललिता वर्मा पारीक ने बताया कि भारतीय संगीत सदन संस्थान का मुख्य उद्देश्य हमारी परंपराओं और संस्कृति को जीवित रखना और उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि श्रृंगार पर्व केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान को सहेजने का प्रयास है।
उन्होंने यह भी बताया कि हर वर्ष इस आयोजन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है, जो यह दर्शाता है कि समाज अपनी जड़ों से जुड़ने के लिए उत्साहित है । कुल मिलाकर कुचामन सिटी का यह श्रृंगार पर्व इस बार परंपरा, संस्कृति और सामाजिक जागरूकता का सुंदर संगम बनकर उभरा, जिसने न केवल मनोरंजन किया बल्कि समाज को एक सकारात्मक संदेश भी दिया।

 

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