- Advertisement -
शारदीय नवरात्रि का महत्व और प्रथम दिन लोक टुडे न्यूज नेटवर्क – रितु मेहरा की रिपोर्ट
हिंदू और सनातन धर्म में नवरात्रि का बहुत महत्व है । नवरात्रि का अर्थ है “नौ रातें”। साल में दो प्रमुख नवरात्रि आती हैं – चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि। शारदीय नवरात्रि आश्विन माह की शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से नवमी तक मनाई जाती है। यह समय वर्ष के सबसे पवित्र अवसरों में गिना जाता है, जब भक्त नौ दिन तक माता दुर्गा और उनके नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं।
पहले नवरात्रि पर किसकी पूजा होती है?
पहले दिन मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा होती है।
शैलपुत्री का अर्थ है “पर्वतराज हिमालय की पुत्री”।
इन्हें नंदी नामक वृषभ (बैल) पर सवार और दाहिने हाथ में त्रिशूल तथा बाएं हाथ में कमल धारण किए हुए दर्शाया जाता है।
मां शैलपुत्री को समस्त देवी स्वरूपों की प्रथम शक्ति माना जाता है।
इनकी पूजा से जीवन में स्थिरता, धैर्य और शक्ति की प्राप्ति होती है।
नवरात्रि का महत्व
1. आध्यात्मिक शुद्धि – नवरात्रि साधना, उपवास और ध्यान का पर्व है, जिससे मन और शरीर दोनों शुद्ध होते हैं।
2. सकारात्मक ऊर्जा – इन नौ दिनों में देवी की आराधना से घर-परिवार में सकारात्मकता और सुख-समृद्धि आती है।
3. शक्ति की उपासना – मां दुर्गा के नौ स्वरूप जीवन की कठिनाइयों से लड़ने की शक्ति देते हैं।
4. सांस्कृतिक धरोहर – नवरात्रि पर्व पर गरबा, डांडिया, रामलीला और जागरण जैसी परंपराएं हमारी संस्कृति को जीवित रखती हैं।
नौ दिनों की पूजा का क्रम
1. प्रथम दिन – मां शैलपुत्री
2. द्वितीय दिन – मां ब्रह्मचारिणी
3. तृतीय दिन – मां चंद्रघंटा
4. चतुर्थ दिन – मां कूष्मांडा
5. पंचमी – मां स्कंदमाता
6. षष्ठी – मां कात्यायनी
7. सप्तमी – मां कालरात्रि
8. अष्टमी – मां महागौरी
9. नवमी – मां सिद्धिदात्री
विशेष पूजन विधि (पहला दिन)
प्रातः स्नान कर घर के मंदिर में कलश स्थापना करें।
मां दुर्गा की प्रतिमा/चित्र के सामने दीपक जलाएं।
लाल वस्त्र अर्पित करें, चंदन, अक्षत, पुष्प और धूप से पूजन करें।
“ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः” मंत्र का जाप करें।
शारदीय नवरात्रि केवल एक धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि शक्ति, भक्ति और साधना का अद्भुत संगम है। पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा से भक्तजन को धैर्य, शांति और जीवन में नई ऊर्जा मिलती है।
- Advertisement -











































