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“सेहत नहीं, सत्ता की सोच है प्राथमिकता?”

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लोक टुडे न्यूज नेटवर्क -हेमराज तिवारी वरिष्ठ पत्रकार

 

भारत की आधी आबादी — महिलाएं — आज भी मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित हैं। खासकर जब बात माहवारी स्वच्छता की आती है, तो तस्वीर और भी चिंताजनक हो जाती है। आज भी देश की करीब 60% महिलाएं माहवारी के दौरान कपड़ा इस्तेमाल करने को मजबूर हैं, जिससे वे संक्रमण, बांझपन और अन्य गंभीर बीमारियों की शिकार होती हैं।

इन परिस्थितियों में सरकार की ज़िम्मेदारी बनती है कि वो इस मुद्दे को गंभीरता से लेकर महिला स्वास्थ्य को प्राथमिकता दे। लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है।

राजस्थान में 11 से 45 वर्ष की 1.23 करोड़ महिलाओं को मुफ्त सेनेटरी पैड उपलब्ध कराए जा रहे थे। यह केवल एक स्वास्थ्य योजना नहीं, बल्कि महिला गरिमा और स्वाभिमान से जुड़ी हुई सोच थी।

लेकिन आज जब राज्य में BJP की डबल इंजन सरकार है और उसके बाद भी भ्रष्टाचार की खबरें भी सामने आ रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, योजना में 1.5 करोड़ रुपये का घोटाला किया गया — मुफ्त मिलने वाले पैड सरकार को ही दोबारा बेच दिए गए।

भरतपुर ज़िले के आंगनवाड़ी केंद्र में पूछताछ करने पर पता चला कि साल 2024 में मात्र 810 सेनेटरी पैड ही भेजे गए थे। यह संख्या न सिर्फ अपर्याप्त है, बल्कि यह दर्शाती है कि महिला स्वास्थ्य को लेकर सरकार के अधिकारी कितने उदासीन है।

महिलाओं का हक़, सरकार की लापरवाही

देश की 40 करोड़ महिलाओं की सेहत के साथ यह लापरवाही सिर्फ एक प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि सामाजिक अपराध के समान है। जो चीज़ महिलाओं का मौलिक अधिकार बननी चाहिए, वह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही है। सरकारें प्रचार और विज्ञापन में करोड़ों खर्च करती हैं, लेकिन ज़मीनी सच्चाई उनसे बिलकुल उलट है।

जरूरत है जवाबदेही की

आज जरूरत है कि सरकार सिर्फ विज्ञापन की राजनीति न करे, बल्कि जमीनी स्तर पर महिलाओं के लिए स्वस्थ और सुरक्षित माहवारी सुनिश्चित करे। साथ ही, उड़ान योजना में हुए घोटाले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को सख़्त सज़ा मिले।

यह मुद्दा किसी एक पार्टी या राज्य का नहीं है — यह भारत की बेटियों, बहनों और माताओं की गरिमा और जीवन से जुड़ा सवाल है।

 

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