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सात सोते हुए बच्चों को छोड़कर भागे माता-पिता!

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

पादुकला से राकेश शर्मा की स्पेशल रिपोर्ट

निष्ठुरता या मजबूरीः
मासूमों की मदद के लिए ग्रामीणों ने बढ़ाया हाथ, प्रशासन को दी सूचना, बाल कल्याण समिति, विधायक भी पहुंचे
सात बच्चों को झुग्गी में छोड़कर अचानक गायब हो गए माता-पिता
जीवनयापन के लिए बच्चे कर रहे संघर्ष
मेड़ता सिटी,नागौर। रेण कस्बे के वार्ड संख्या 20 स्थित चौकीदारों के मोहल्ले में झुग्गी में सात बच्चों को रात में नींद में सोता छोड़कर उनके माता-पिता गायब हो गए। मां अकेले ही देखभाल करती रही, बाद में वह भी अचानक कहीं चली गई, करीब तीन माह से सात बच्चे जीवनयापन के लिए संघर्ष कर रहे है। इन सात बच्चों की उम्र 15 वर्ष से अधिक नहीं है
नींद में बच्चों को छोड़कर गए
घनश्याम चौकीदार (पिता) और रेखा चौकीदार (माता) अपने सात बच्चों के साथ लंबे समय से झुग्गी-झोपड़ी में रह रहे थे। लगभग तीन माह पहले घनश्याम घर छोड़कर कहीं चला गया। पति के जाने के बाद रेखा ने भी दिनों तक बच्चों के साथ गुजारा किया, लेकिन वह भी एक रात बच्चों को सोता हुआ छोड़कर लापता हो गई। अब इस घटना को तीन महीने बीत चुके हैं, लेकिन दोनों का कोई सुराग नहीं लगा है।
कुछ दूर ही रहने वाली पड़ोसी दया वैष्णव और उनकी पुत्री सोनू वैष्णव को जब इस स्थिति की जानकारी मिली, तो उन्होंने बच्चों की मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाया। उन्होंने बच्चों को सर्दी से बचाव के लिए ऊनी और अन्य आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध करवाई। इसके साथ ही व्यापारी श्याम सुंदर लखारा सहित कई समाज सेवियों ने भी सहयोग किया। इंदिरा रसोई के माध्यम से बच्चों के लिए दोनों समय का भोजन रही है। जागरूक ग्रामीणों ने इन मासूम बच्चों की स्थिति को देखते हुए बाल विकास कल्याण विभाग नागौर को सूचना देकर बच्चों को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध करवाने का आग्रह किया।
बाल कल्याण समिति ने करवाया स्वास्थ्य परीक्षण
सूचना मिलने पर बाल कल्याण समिति न्यायपीठ नागौर के अध्यक्ष डॉ. मनोज सोनी और मेड़ता विधायक लक्ष्मणराम कलरू रेण स्थित बच्चों की झुग्गी-झोपड़ी में पहुंचे। उन्होंने आसपास के पड़ोसियों से बातचीत कर बच्चों के बारे में पूरी जानकारी ली। एक बच्चे के सिर पर गहरा घाव हो गया था। सभी बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण को लेकर रेण सीएचसी लाया गया, जहां डॉ. महेंद्र विश्नोई, डॉ. पंकज कुमार मीणा, रामकिशोर मेघवाल ने मेडिकल प्रक्रिया पूरी की। रेण चौकी प्रभारी रामप्रकाश माली, सीताराम तांडी की देखरेख में 108 एंबुलेंस के ईएमटी शिवदयाल घांची, भूराराम मेघवाल बच्चों को एंबुलेंस के जरिए नागौर लेकर गए। तीन बच्चों को राजकीय शिशु गृह नागौर भेजा गया, दो बालिकाओं को वन स्टॉप भेजा गया।

सात बच्चे पैदा कर दिए और छोड़कर भाग गए

सबसे बड़ा सवाल यह है कि 7-7 बच्चे पैदा  करने के बाद पहले पिता भाग गया ,जिम्मेदार नहीं निभा पाया, जब बाप भाग गया तो उसके बाद मां भी भाग गई। दरअसल बड़ी विडंबना है कि इस तरह के लोग सामाजिक ताने-बाने को छिन्न भिन्न करने में लगे हैं।  जब बच्चों को पाल नहीं सकते तो पैदा क्यों किया, और पैदा किया तो फिर उनको पालना चाहिए । ऐसे जिम्मेदारी से मुंह छुपा कर  भागना भी ठीक नहीं है। ऐसे कई मामले सामने आए तो आप प्रशासन और सरकार की नजर में जरूर लाएं ताकि उन बच्चों की जान बचाई जा सके उन्हें स्वस्थ नागरिक बनाया जा सके।

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