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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
डूंगरपुर–बांसवाड़ा। सांसद राजकुमार रोत की अध्यक्षता में चल रही एक बैठक उस समय हंगामे में बदल गई, जब उदयपुर से भाजपा सांसद मन्नालाल रावत ने बैठक के एजेंडे को लेकर आपत्ति जता दी। इसी दौरान राजकुमार रोत ने सहज भाव में कहा—
“तूम बता दो, बैठक में क्या एजेंडा रहेगा?”
बस इतना कहना था कि मन्नालाल रावत भड़क उठे। गुस्से में उन्होंने पहले ऊंची आवाज़ में चिल्लाना शुरू किया और फिर राजकुमार रोत पर हमला करने के इरादे से जूता निकालने की कोशिश तक कर डाली। बैठक में मौजूद लोग हक्के-बक्के रह गए।
हालांकि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान सांसद राजकुमार रोत पूरी तरह संयमित और शांत नजर आए। उन्होंने बार-बार शांति बनाए रखने की अपील की। दोनों सांसदों के बीच तीखी तू-तू, मैं-मैं हुई, लेकिन रोत के शांत रवैये के चलते मामला हाथापाई तक नहीं पहुंचा।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यदि राजकुमार रोत भी आक्रामक रुख अपनाते, तो बैठक में ही लात-घूंसे चलना तय था। मौके पर मौजूद लोगों ने बीच-बचाव कर किसी तरह स्थिति को संभाला। राजकुमार रोत यही कहते नजर आए की सांसद रावत बैठक बिगाडने ए हैं यह झगड़ा करने आए हैं। वहीं मन्नालाल रावत बैठक एजेंडा के अनुसार चलाने की बात कहते रहे और टेबल ठोकते रहे।
इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में दोनों सांसदों की आपसी तकरार और इस्तेमाल की गई भाषा को लेकर लोग जमकर चुटकियां ले रहे हैं।
सवाल यह भी उठ रहा है कि जब जनप्रतिनिधियों का व्यवहार सार्वजनिक बैठकों में इस स्तर तक गिर जाए, तो आम जनता से मर्यादा की उम्मीद कैसे की जा सकती है। कम से कम लोकतांत्रिक मंचों पर संयम और गरिमा बनाए रखना सभी जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है।
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