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सांगानेर की 87 कॉलोनियों पर कोर्ट के आदेश से हाहाकार، बोले हमारे सीने पर चले बुलडोजर

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
सांगानेर की 87 कॉलोनियों पर कोर्ट के आदेश से मचा हड़कंप
लोग बोले – “हम मर जाएंगे लेकिन अपने घर नहीं तोड़ने देंगे”
पहले हमारी लाशों से गुजरेगा बुलडोजर उसके बाद तोड़ने देंगे घर
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा सांगानेर क्षेत्र की 87 कॉलोनियों को अवैध मानते हुए राजस्थान हाउसिंग बोर्ड को कार्रवाई के आदेश देने के बाद इलाक़े में हड़कंप मच गया है। कोर्ट के आदेश की खबर मिलते ही इन कॉलोनियों में रहने वाले हजारों परिवारों की रातों की नींद उड़ गई है।
लोगों का कहना है कि वे पिछले 30-40 सालों से इन कॉलोनियों में रह रहे हैं, उनके पास रजिस्टर्ड समिति के दस्तावेज, पानी-बिजली-सीवरेज के कनेक्शन, और नगर निगम के टैक्स रसीदें तक हैं।
“तीन पीढ़ियां बीत गईं, अब अवैध कैसे हो गए?”
स्थानीय निवासी सविता सिंह, दीपिका सिंह, राधा मोहन शर्मा, प्रियंका अग्रवाल, हरिनारायण यादव, मृदुल गुप्ता, मोहनलाल शर्मा, नारायण मीणा, रामकिशन बैरवा, सीताराम सीता समेत सैकड़ों लोगों ने कहा कि उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी की कमाई लगाकर ये घर बनाए हैं।
 “हमने गहने बेचे, कर्ज लिया, बैंकों से लोन लेकर घर बनाए। सरकार ने खुद हमें पानी-बिजली दी, अब अचानक अवैध कैसे हो गए? अगर हम अवैध हैं तो फिर वोट किसको दिए?”
⚖️ “भजनलाल जी अगर वैध हैं तो हम भी वैध हैं”
लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पहले उनके विधायक  हैं और बाद में मुख्यमंत्री हैं, इसलिए उनकी जिम्मेदारी बनती है कि वे इन कॉलोनियों को बचाएं और नियमन कराएं।
 “हम किसी भी कीमत पर अपने घर नहीं तोड़ने देंगे। अगर ज़रूरत पड़ी तो बुलडोज़र के सामने लेट जाएंगे।”
डर और दहशत का माहौल
कोर्ट के आदेशों के बाद इलाके में तनाव और डर का माहौल है। कई बुजुर्गों को हार्ट अटैक आ चुका है, महिलाएं लगातार रो रही हैं, और युवा तनावग्रस्त हैं।
लोगों का कहना है कि कोर्ट में सही स्थिति नहीं बताई गई — सिर्फ खाली भूखंडों की रिपोर्ट दी गई जबकि 80–90% कॉलोनियों में लोग बस चुके हैं।
“2 लाख लोगों को बेघर करना कहां का न्याय?”
इन 87 कॉलोनियों में लगभग 10 से 15 हजार मकान हैं, जिनमें करीब दो लाख लोग रहते हैं।
 “अगर कुछ सरकारी गलती हुई है तो बस चुके घरों को नियमित किया जाए। बसाए हुए लोगों को उजाड़ना अन्याय है। सरकार और कोर्ट दोनों को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए।”
लोगों की मांग
राजस्थान सरकार और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा कोर्ट में वस्तुस्थिति स्पष्ट करें।
पहले से बसे घरों का नियमन किया जाए।
खाली पड़े बडे भूखंडों को ही अधिग्रहित किया जाए।
बुलडोज़र कार्रवाई पर रोक लगे
“हम मरने को तैयार हैं, लेकिन घर नहीं छोड़ेंगे”
लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि कार्रवाई की गई तो वे सामूहिक आंदोलन करेंगे।
 “सुप्रीम कोर्ट और सरकार चाहे तो हमें एक साथ मार दे, लेकिन हमारे घर नहीं तोड़े जाएं। हम मर जाएंगे पर घर नहीं छोड़ेंगे।”

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